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वॉशिंगटन/तेहरान:ईरान-अमेरिका तनाव,परमाणु हमले की चेतावनी पर बढ़ा विवाद

वॉशिंगटन/तेहरान, 1 अप्रैल 2025 – अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने परमाणु समझौते पर कोई रियायत नहीं दी तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के सलाहकार अली लारिजानी ने पलटवार करते हुए कहा है कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी देशों ने ईरान पर हमला किया, तो ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के लिए मजबूर हो जाएगा।

रूस और चीन का समर्थन बना ईरान की ताकत

ईरान इस विश्वास के साथ अमेरिका को चुनौती दे रहा है कि रूस और चीन उसके साथ खड़े हैं। वैश्विक समीकरणों में ये दोनों बड़े देश ईरान को कूटनीतिक और सैन्य रूप से समर्थन दे सकते हैं। ईरान के पास विकसित मिसाइल प्रणाली और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) जैसी सैन्य ताकत मौजूद है, जो अमेरिका के खिलाफ जवाबी हमला करने की क्षमता रखती है।

ईरान की सैन्य ताकत और सीधी चेतावनी

ईरानी कमांडर जनरल अमीर अली हाजीज़ादेह ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि क्षेत्र में अमेरिका के कम से कम 10 सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जहां करीब 50,000 सैनिक तैनात हैं। अगर अमेरिका हमला करता है, तो उसे करारा जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा, “जो लोग कांच के घरों में रहते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।”

संयुक्त राष्ट्र में ईरान का सख्त रुख

ईरान ने सिर्फ धमकी नहीं दी, बल्कि संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर अमेरिका की धमकियों को गैर-जिम्मेदाराना बताया है। ईरान के राजदूत अमीर सईद इरवानी ने साफ किया कि अगर अमेरिका या इस्राइल ने कोई आक्रामक कदम उठाया, तो ईरान तुरंत और मजबूती से जवाब देगा।

अमेरिका को हमले की आशंका

ब्रिटिश अखबार ‘द टेलीग्राफ’ के अनुसार, ईरानी सैन्य अधिकारी पहले से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट में डिएगो गार्सिया द्वीप स्थित अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य अड्डे को संभावित लक्ष्य बताया गया है। अगर ईरान इस ठिकाने पर हमला करता है, तो यह अमेरिका के लिए बड़ा झटका होगा।

तनाव के इस बढ़ते माहौल में अब दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच यह तनातनी युद्ध में बदलेगी या कोई राजनयिक समाधान निकलेगा।

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