बिहार में होगी निवेश की बरसात, पीएम मोदी–सीएम नीतीश की जुगलबंदी बदलेगी राज्य की तस्वीर

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के साथ राज्य में विकास की नई उम्मीदें मजबूत हुई हैं। भाजपा और जेडीयू की संयुक्त ताकत ने यह साफ कर दिया कि जनता ने ‘डबल इंजन’ सरकार के मॉडल पर भरोसा दोबारा जताया है। अब पूरा फोकस उन बड़े वादों और योजनाओं पर है, जिन्हें चुनाव प्रचार के दौरान जनता के सामने रखा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जुगलबंदी अब बिहार को ‘सुपर इकोनॉमी’ बनाने के दावे के साथ आगे बढ़ रही है।
सबसे बड़ी उम्मीद युवाओं की है, जिन्हें गठबंधन ने एक करोड़ से अधिक नौकरियों का आश्वासन दिया है। हर जिले में मेगा स्किल सेंटर स्थापित करने की योजना है, ताकि बिहार को ग्लोबल स्किल हब के रूप में विकसित किया जा सके। औद्योगिक क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार ने 1.8 लाख करोड़ रुपये के भारी निवेश का दावा किया है। 25 नई चीनी मिलें खोले जाने की घोषणा भी उद्योग विस्तार की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर सात एक्सप्रेसवे, चार शहरों में मेट्रो सेवा और 3600 किलोमीटर रेल मार्ग के आधुनिकीकरण की योजना प्रस्तावित है। पटना के पास ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के साथ दस शहरों में घरेलू उड़ानों की सुविधा बढ़ाई जाएगी। सड़क निर्माण में 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होने का अनुमान है। इसी बीच अदाणी ग्रुप ने भी मुंगेर–सुल्तानगंज रोड प्रोजेक्ट में काम शुरू कर दिया है, जिससे राज्य में बड़े उद्योगपतियों की दिलचस्पी का संकेत मिलता है।
गरीबों, किसानों और महिलाओं के लिए सरकार ने ‘पंचामृत गारंटी’ पेश की है, जिसमें मुफ्त राशन, 125 यूनिट मुफ्त बिजली और 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज शामिल है। महिलाओं को दो लाख रुपये तक की सहायता राशि देने और एक करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों को कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि के तहत वार्षिक तीन हजार रुपये और पंचायत स्तर पर एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने की योजना है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट और एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर में एक लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य तय किया गया है।
इन सभी पहलों से स्पष्ट है कि मोदी–नीतीश सरकार अपनी नई पारी में बिहार को विकास की रफ्तार देने के लिए बड़े पैमाने पर काम शुरू करने जा रही है।





