नक्सली बालकृष्ण के इनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी: सरेंडर गार्ड से पुलिस को मिला सुराग, 15 दिन की प्लानिंग के बाद किया ढेर

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर थाना क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई बड़ी मुठभेड़ में 1 करोड़ के इनामी नक्सली मोडेम बालकृष्ण समेत 10 नक्सली मारे गए। एसपी निखिल राखेचा और रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने इसकी पुष्टि की। मटाल के पहाड़ी इलाके में यह मुठभेड़ कई घंटे तक चली, जिसमें एसटीएफ, कोबरा और राज्य पुलिस की संयुक्त टीम शामिल थी।
मारे गए नक्सलियों में केंद्रीय समिति सदस्य और ओडिशा स्टेट कमेटी के सचिव बालकृष्ण भी शामिल है। बालकृष्ण को जनवरी में चलपती के मारे जाने के बाद गरियाबंद, धमतरी और नुआपड़ा डिवीजन को मजबूत करने की जिम्मेदारी मिली थी। पुलिस को उसकी मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद संयुक्त अभियान शुरू किया गया था।
सूत्रों के अनुसार, 25 साल से फरार चल रहा बालकृष्ण लंबे समय से शुगर की बीमारी से जूझ रहा था। उसके सिर के बाल झड़ चुके थे और वह लाठियों के सहारे चलता था। उसकी कमजोरी की जानकारी हाल ही में सरेंडर हुए नक्सली गार्ड कैलाश ने पुलिस को दी थी। इसी सुराग के आधार पर सुरक्षा बलों ने यह सफल ऑपरेशन अंजाम दिया।
सुरक्षाबलों ने बताया कि नक्सलियों के शव जंगल में पड़े हुए हैं और इलाके में आईईडी लगाए होने का खतरा है, इसलिए रात में सर्च ऑपरेशन नहीं चलाया जा सका। मुठभेड़ में बालकृष्ण और उसके साथियों के मारे जाने को सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी सफलता माना है, क्योंकि वह दो दशकों से अधिक समय से नक्सली गतिविधियों का बड़ा चेहरा था।





