होर्मुज संकट में भारत के 5 जहाज बने राहत की उम्मीद, गैस संकट के बीच सुरक्षित वापसी शुरू

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई, जिसका असर भारत पर भी पड़ा। इस दौरान खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाजों को कूटनीतिक प्रयासों के बाद सुरक्षित रास्ता मिला और अब धीरे-धीरे उनकी वापसी शुरू हो गई है।

अब तक पांच भारतीय जहाज इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर चुके हैं या भारत पहुंचने वाले हैं। इनमें एलपीजी टैंकर शिवालिक और नंदा देवी शामिल हैं, जो क्रमशः 16 मार्च और 17 मार्च को भारत पहुंचे। इन जहाजों के जरिए करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी भारत लाया गया है। इसके अलावा जग प्रकाश, जग लाडकी और देश विभोर जैसे टैंकर भी इस मार्ग को पार कर चुके हैं या जल्द पहुंचने वाले हैं।

जग लाडकी करीब 80,800 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है, जबकि जग प्रकाश के 21 मार्च तक पहुंचने की संभावना है। इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भारतीय नौसेना लगातार निगरानी और सुरक्षा प्रदान कर रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, जहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। इस मार्ग के बंद होने से भारत में एलपीजी की कमी देखी गई, जिससे कई जगहों पर कालाबाजारी और कीमतों में बढ़ोतरी की शिकायतें सामने आईं।

गैस संकट का असर खासतौर पर होटल और रेस्तरां व्यवसाय पर पड़ा, जहां वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करना पड़ा। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार की तैयारी और प्रबंधन पर सवाल उठाए, जबकि सरकार का कहना है कि हालात को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में अपने युद्धपोत तैनात कर रखे हैं और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने के लिए एस्कॉर्ट किया जा रहा है। इससे न केवल जहाजों की सुरक्षित वापसी संभव हो रही है, बल्कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को भी स्थिर बनाए रखने में मदद मिल रही है।

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