ईरान में फंसे भारतीय छात्र और तीर्थयात्री, डर और अनिश्चितता के बीच सरकार से मांगी मदद

दिल्ली। ईरान में क्षेत्रीय तनाव के बढ़ने के कारण वहां पढ़ाई कर रहे दर्जनों भारतीय छात्र और तीर्थयात्रियों के समूह फंस गए हैं। हालात गंभीर होने के चलते इन छात्रों के परिवार भारत में बेहद चिंतित हैं और उन्होंने भारत सरकार से तुरंत सहायता और सुरक्षित वापसी की अपील की है।
‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत उत्तरी ईरान में फंसे 100 से अधिक छात्रों को पहले अर्मेनिया ले जाया गया और वहां से गुरुवार सुबह दिल्ली लाया गया। ईरान में फंसे छात्रों ने वीडियो संदेश और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने हालात बयां किए हैं। उनका कहना है कि वहां भय और असुरक्षा का माहौल है, संचार सुविधाएं बाधित हैं और बुनियादी सुविधाएं मिलना मुश्किल हो गया है। कई छात्रों के पास रहने और खाने की व्यवस्था के साधन भी खत्म हो रहे हैं, जिससे भारत में उनके परिजन और भी चिंतित हैं।
भारतीय दूतावास छात्रों के संपर्क में
कुछ छात्रों ने बताया कि उन्होंने मिसाइलें और ड्रोन उड़ते देखे हैं और तेहरान समेत कुछ क्षेत्रों की स्थिति “बेहद खराब” और “संकटपूर्ण” है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास छात्रों से लगातार संपर्क में है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने छात्रों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और संयम बरतने की सलाह दी है।
तीर्थयात्रियों की सेहत को खतरा नहीं
वहीं मौलाना हैदर अब्बास ने कहा कि हालात युद्ध जैसे जरूर हैं लेकिन फिलहाल तीर्थयात्रियों की सेहत को कोई खतरा नहीं है, केवल यात्रा व्यवस्थाएं चुनौतीपूर्ण हैं। सरकार से मांग की जा रही है कि विशेष उड़ानों के जरिए छात्रों को भारत लाया जाए ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।





