भारत चांद पर फिर रचेगा इतिहास, मिशन चंद्रयान- 5 को मिला ग्रीन सिग्नल

भारत एक बार फिर चांद पर अपना परचम लहराने पूरी तरह से तैयार है। जी हां और केंद्र सरकार ने इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को चन्द्रमा पर स्टडी करने के लिए मिशन चंद्रयान- 5 के लिए मंजूरी भी दे दी है। जिसे लेकर इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने जानकारी भी साझा की है।
मिशन चंद्रयान- 5 इस बार चांद की सतह का रिसर्च करने के लिए 250 किलोग्राम का रोवर लेकर जाएगा। बता दें कि मिशन चंद्रयान- 3 में केवल 25 किलोग्राम का ही रोवर ले जाया गया था। यानी कि मिशन चंद्रयान- 5 में इससे 10 गुना ज्यादा का रोवर चांद की सतह पर लैंड कराया जाएगा।
इसमें खास बात यह है कि इस मिशन में भारत अकेला नहीं होगा, बल्कि जापान के साथ मिलकर इसे अंजाम देगा। इससे पहले चंद्रयान-3 मिशन में कम वजनी रोवर प्रज्ञान चांद पर भेजा गया था, लेकिन इस बार इससे दस गुना भारी रोवर भेजा जाएगा, जिससे ज्यादा उन्नत रिसर्च संभव हो सकेगी।
इस मिशन से चंद्रमा पर भारत की मौजूदगी और भी मजबूत होगी। बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन में 25 किलो के रोवर प्रज्ञान को चांद पर भेजा गया था, वहीं अब चंद्रयान-5 मिशन में सीधा दस गुना ज्यादा वजनी 250 किलो के रोवर को चांद की सतह पर लैंड कराया जाएगा।
इसरो की अन्य योजनाओं में गगनयान मिशन और भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाना शामिल है। हाल ही में इसरो ने स्पैडेक्स (स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट) का सफल परीक्षण किया, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए अहम साबित होगा। चंद्रयान-5 के साथ इसरो एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है।
चंद्रयान मिशन का मुख्य मकसद चांद की सतह का स्टडी करना है। मिशन चंद्रयान- 1 साल 2008 में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। जिसने चन्द्रमा के केमिकल, खनिज और फोटो-जियोलॉजिक मौपिंग की।





