ट्रंप टैरिफ का तोड़ निकालने के लिए भारत-EU आए साथ

दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत अब निर्णायक चरण में है। नई दिल्ली में 8 सितंबर से शुरू हो रही 13वीं दौर की वार्ता में गैर-टैरिफ रुकावटें, बाजार में पहुंच और सरकारी खरीद जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों पक्षों का लक्ष्य इस साल के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देना है, ताकि वैश्विक व्यापार में नई मिसाल कायम हो सके।

अमेरिका की टैरिफ नीतियों से पैदा हुई अस्थिरता ने इस समझौते को और अहम बना दिया है। ईयू और भारत 2026 की पहली तिमाही में होने वाले शिखर सम्मेलन की तैयारी में भी जुटे हैं। इसमें नई रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की जा सकती है। अब तक 23 में से 11 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है, जिनमें डिजिटल व्यापार, सीमा शुल्क और बौद्धिक संपदा शामिल हैं। सेवाओं और निवेश पर भी जल्द सहमति बनने की संभावना है।

भारत ने चावल, चीनी और डेयरी उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है, जबकि ईयू ऑटोमोबाइल और स्पिरिट्स के लिए बाजार चाहता है। अमेरिका द्वारा झींगे पर टैरिफ बढ़ाने के बाद ईयू भारत के एक्वाकल्चर निर्यात को बढ़ावा देने पर भी विचार कर रहा है। पिछले साल भारत ने अमेरिका को 2.8 अरब डॉलर के झींगे निर्यात किए थे।

इसके अलावा, भारत और ईयू आतंकवाद-रोधी सहयोग और ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) के जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कम्प्यूटिंग और रक्षा क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ा रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर नवंबर में ब्रसेल्स में इंडो-पैसिफिक फोरम में हिस्सा लेंगे, जबकि ईयू के शीर्ष आयुक्त भी जल्द नई दिल्ली आकर वार्ता को राजनीतिक गति देंगे। यह समझौता दोनों पक्षों के लिए सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोग का भी नया अध्याय साबित हो सकता है।

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