पश्चिम एशिया युद्ध का असर, भारत में पेट्रोल-डीजल 3 रुपये महंगा; आम आदमी पर बढ़ा महंगाई का बोझ

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। शुक्रवार से देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये, मुंबई में 106.68 रुपये, कोलकाता में 108.74 रुपये और चेन्नई में 103.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।

बीते कुछ दिनों में सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि सीएनजी, दूध और गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली और मुंबई में सीएनजी 2 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है। वहीं अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं।

डीजल महंगा होने का सीधा असर परिवहन और खेती पर पड़ता है। ट्रक और मालवाहक वाहनों का खर्च बढ़ने से सब्जियां, फल और राशन जैसी जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं। किसानों के लिए ट्रैक्टर और पंप चलाने की लागत भी बढ़ेगी, जिससे कृषि उत्पादन महंगा होगा। बस और ऑटो किराए में भी बढ़ोतरी की आशंका है।

मुंबई, जयपुर और लखनऊ समेत कई शहरों में लोगों ने बढ़ती महंगाई पर नाराजगी जताई है। आम लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों से घर का बजट बिगड़ रहा है और गरीब व मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल महंगा होने की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। युद्ध की वजह से तेल सप्लाई और परिवहन प्रभावित हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।

तेल कंपनियों का कहना है कि महंगे कच्चे तेल के कारण उन्हें नुकसान हो रहा था, इसलिए कीमतें बढ़ानी पड़ीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट जारी रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं।

वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की गलती की कीमत जनता चुका रही है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी महंगाई पर तंज कसते हुए कहा कि “आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है।”

सरकार का कहना है कि वैश्विक हालात के बावजूद भारत में तेल कीमतों को लंबे समय तक स्थिर रखा गया और एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर जनता को राहत देने की कोशिश की गई थी।

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