रायपुर में बढ़ती अवैध प्लाटिंग: मिलीभगत और खानापूर्ति की कार्रवाई से परेशान आम लोग

रायपुर। रायपुर के आउटर क्षेत्रों में तेजी से अवैध प्लाटिंग हो रही है। निगम, प्रशासन और पुलिस को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, जब तक कि किसी नागरिक की शिकायत सामने न आ जाए। आमतौर पर अधिकारियों की मिलीभगत के चलते अवैध प्लॉटिंग पर समय रहते रोक नहीं लगाई जाती। जब लोग फंसते हैं, तब कार्रवाई के नाम पर कभी सड़क काटी जाती है तो कभी दीवारें तोड़ी जाती हैं, लेकिन पूरा निर्माण नहीं गिराया जाता।
इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी खामी यह है कि अवैध जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक नहीं लगाई जाती। इसके चलते वही जमीन बार-बार अलग-अलग लोगों को बेची जाती है। रजिस्ट्री रोकने की प्रक्रिया में निगम, तहसील और पुलिस की रिपोर्ट के बाद कलेक्टर कार्रवाई करते हैं। लेकिन पिछले 10 साल में केवल 300 खसरा नंबरों को ही ब्लॉक किया गया है।
राज्य सरकार ने 2178 वर्गफीट से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर रोक लगाई थी, लेकिन दलालों ने दो लोगों के नाम से रजिस्ट्री कर इसका भी तोड़ निकाल लिया। कमल विहार के पास स्टॉल लगाकर खुलेआम जमीन बेची जा रही है। ‘दैनिक भास्कर’ की पड़ताल में यह खुलासा हुआ।
निगम कमिश्नर विश्वदीप ने कहा कि सभी जोन कमिश्नरों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं और एफआईआर भी की जा रही है। फिर भी जोरा, पिरदा, टाटीबंध, बोरियाखुर्द जैसे इलाकों में कृषि जमीन पर भारी प्लॉटिंग चल रही है। जोन-5, 8 और 9 में अवैध निर्माणों पर फिर कार्रवाई की गई, लेकिन यह समस्या अब भी जारी है।





