बस्तर अब नक्सल मुक्त, विकास की नई शुरुआत: अमित शाह

जगदलपुर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने कहा कि बस्तर में अब डर और भय का माहौल खत्म हो चुका है और क्षेत्र तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब नक्सल मुक्त हो गया है और यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद की वजह से बस्तर लंबे समय तक विकास से पीछे रह गया था। अब 19 मई 2026 से बस्तर में संपूर्ण विकास की नई शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा।
‘वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ में मिलेंगी कई सुविधाएं
गृहमंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बने 200 सुरक्षा कैंपों में से 70 कैंपों को अब “वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां ग्रामीणों को एक ही जगह पर सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
इन सेवा डेरा केंद्रों में बैंकिंग सुविधा, आधार कार्ड सेवा, डिजिटल सेवाएं, कौशल प्रशिक्षण, राशन, प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उनका उद्देश्य सरकार की सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना है।
महिलाओं को पशुपालन से जोड़ने की योजना
अमित शाह ने कहा कि बस्तर की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें पशुपालन से जोड़ा जाएगा। सरकार महिलाओं को गाय और भैंस उपलब्ध कराएगी। अगले छह महीनों में बस्तर में बड़ा डेयरी नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
सड़क, मोबाइल टावर और बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार
गृहमंत्री ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हजारों मोबाइल टावर लगाए गए हैं। इसके अलावा बैंक शाखाएं, एटीएम और पोस्ट ऑफिस भी खोले गए हैं।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में एकलव्य स्कूल, आईटीआई और स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले गए हैं, ताकि युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार मिल सके।
जगदलपुर में बनेगा 240 बिस्तरों का अस्पताल
अमित शाह ने कहा कि जगदलपुर में 240 बिस्तरों वाले बड़े अस्पताल का निर्माण किया जाएगा। इसका भूमिपूजन भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर के लोगों को डर के साथ नहीं बल्कि विकास और विश्वास के साथ जीने का अवसर मिलेगा।
खेल और संस्कृति को भी बढ़ावा
उन्होंने बताया कि आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए “बस्तर पंडुम” का आयोजन किया जा रहा है। वहीं युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए “बस्तर ओलंपिक” आयोजित किया जा रहा है, जिसमें लाखों खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसमें आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों ने भी भाग लिया।





