अंतरिक्ष में कैसे बनता है स्पेस स्टेशन? जानिए पूरी प्रक्रिया, खर्च और समय

नई दिल्ली,12 अप्रैल 2025:भारत अब चांद पर अपने यान उतारने और अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है। केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में घोषणा की कि भारत 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाएगा और 2040 तक चांद पर अंतरिक्ष यात्री भेजेगा।

स्पेस स्टेशन दरअसल एक विशाल अंतरिक्ष यान होता है, जो पृथ्वी की परिक्रमा करता है और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए घर और प्रयोगशाला का काम करता है। इसे एक साथ कई देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां मिलकर बनाती हैं। इसकी सबसे बड़ी मिसाल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) है, जो अमेरिका, रूस, जापान, यूरोप और कनाडा की संयुक्त पहल से बना है।

स्पेस स्टेशन को कई हिस्सों में पृथ्वी पर तैयार किया जाता है और फिर रॉकेट के माध्यम से उन्हें अंतरिक्ष में ले जाकर जोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल होती है और इसके लिए विशेष अंतरिक्ष सूट और उपकरणों की ज़रूरत होती है। ISS की ऑर्बिट पृथ्वी से लगभग 250 मील ऊपर है।

ISS का निर्माण 1998 में शुरू हुआ और 2011 में पूरा हुआ। इसे बनाने में करीब 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च आया। इस स्टेशन का आकार एक फुटबॉल मैदान जितना बड़ा है और इसमें एक साथ छह लोग रह सकते हैं। इसमें दो बाथरूम, एक जिम और एक बड़ी खिड़की है।

स्पेस स्टेशन को सौर ऊर्जा से बिजली मिलती है, जो इसके किनारों पर लगे सोलर पैनलों से प्राप्त होती है। इसके बाहर रोबोटिक आर्म्स भी होते हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सहायता करते हैं।

आज तक 20 देशों के 258 अंतरिक्ष यात्री ISS का दौरा कर चुके हैं, जिनमें भारत की कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स भी शामिल हैं। भारत के लिए अब यह सपना साकार होने की ओर बढ़ रहा है।

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