बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को जमानत मिली, रिहाई अब भी अधर में

ढाका, बांग्लादेश |
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हाईकोर्ट ने पांच महीने से देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दे दी है। चिन्मय दास, जिनका असली नाम चंदन कुमार धर है, चटगांव स्थित इस्कॉन के प्रमुख हैं और सनातन जागरण मंच के प्रवक्ता भी हैं।
गिरफ्तारी और आरोप
चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने देशद्रोह और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप लगाया। इस गिरफ्तारी के समय कोई वारंट नहीं दिखाया गया, जिससे इस्कॉन से जुड़े सदस्यों में रोष उत्पन्न हुआ।
कानूनी लड़ाई
चिन्मय दास के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने 23 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। 2 जनवरी 2025 को चटगांव की निचली अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
रिहाई पर संशय
हालांकि हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन अभी तक रिहाई की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। उनके वकील का कहना है कि अगर बांग्लादेशी सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर रोक नहीं लगाता, तो चिन्मय दास को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा।
बांग्लादेश में अशांति
5 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद देश में हिंसा की लहर फैल गई थी, जिसमें हिंदू समुदाय को निशाना बनाया गया। इस परिस्थिति में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा हेतु सनातन जागरण मंच का गठन हुआ, और चिन्मय प्रभु इसके प्रमुख वक्ता बने। उन्होंने चटगांव और रंगपुर में बड़ी रैलियों को संबोधित किया, जिनमें हजारों लोग शामिल हुए।





