बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सेवा नियमों की अनदेखी पर शिक्षा विभाग का आदेश रद्द, शिक्षक को मिलेगी पदोन्नति पर दोबारा सुनवाई का मौका

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गलत तरीके से की गई पदोन्नति के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने विभाग का पुराना आदेश रद्द करते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को नियमों के खिलाफ उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह मामला शिक्षक दिनेश कुमार राठौर से जुड़ा है, जिन्होंने शिकायत की थी कि योग्य होने के बावजूद उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई, जबकि उनसे कनिष्ठ शिक्षकों को आगे बढ़ा दिया गया।
राठौर ने बताया कि उनकी नियुक्ति 1989 में हुई थी और बाद में उन्हें उच्च वर्ग शिक्षक के पद पर भी पदोन्नति मिली। नियमों के अनुसार वे व्याख्याता के पद के लिए पात्र थे, लेकिन विभाग ने उनकी योग्यता पर गलत आपत्ति लगाकर उनके नाम को नजरअंदाज कर दिया। विभाग ने कहा था कि 2010 में उनके पास पीजी की डिग्री नहीं थी, जबकि राठौर ने 2012 में यह डिग्री हासिल कर ली थी। इसके बावजूद उनके मामले पर विचार नहीं किया गया।
न्यायमूर्ति संजय जायसवाल की बेंच ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नियमों का पालन जरूरी है और मनमाने तरीके से किसी कर्मचारी के अधिकार नहीं छीने जा सकते। कोर्ट ने शिक्षक को निर्देश दिया कि वे अपनी मांगों का अभ्यावेदन विभाग में प्रस्तुत करें और साथ ही सरकार को आदेश दिया कि भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2008 के तहत 90 दिनों के भीतर उनका मामला तय किया जाए।
इस फैसले को शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि सेवा नियमों की अनदेखी करने पर विभाग को जवाब देना होगा और किसी के साथ अन्याय नहीं किया जा सकता।





