हाईकोर्ट की सख्ती: रोक के बावजूद प्राचार्य प्रमोशन और ज्वॉइनिंग, कोर्ट ने सभी नियुक्तियां की अमान्य घोषित

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई है। मामला प्राचार्य प्रमोशन से जुड़ा है, जहां कोर्ट की स्पष्ट रोक के बावजूद न केवल प्रमोशन लिस्ट जारी कर दी गई, बल्कि कुछ शिक्षकों को पदभार भी सौंप दिया गया। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी ज्वॉइनिंग को अमान्य करार दिया है और प्रमोशन की पूरी प्रक्रिया पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
क्या है मामला?
बुधवार को हुई सुनवाई में जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच के सामने याचिकाकर्ता पक्ष ने बताया कि कोर्ट की रोक के बावजूद 30 अप्रैल को प्रमोशन लिस्ट जारी कर दी गई और 2 मई को कई प्राचार्यों को कार्यभार भी सौंप दिया गया। कोर्ट ने इसे अवमानना मानते हुए पूछा कि किसके आदेश पर यह सब किया गया और कितने लोगों ने ज्वॉइन किया।
कोर्ट ने सभी ज्वॉइनिंग को रद्द कर दिया है और अगली सुनवाई की तारीख 9 जून तय की है। तब तक प्रमोशन से जुड़ी कोई भी प्रक्रिया नहीं की जा सकेगी।
शिक्षा विभाग की दलील
वहीं शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह प्रमोशन 10 साल बाद हुआ है और इससे 2813 स्कूलों को लाभ मिलना था। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने शिक्षकों से धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विभाग कोर्ट में अपना पक्ष रख चुका है और न्याय की पूरी उम्मीद है।
फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार सभी नियुक्तियों और प्रमोशन पर पूर्ण रोक लागू है।





