हिडमा का अंत: एक करोड़ का इनामी नक्सली कमांडर एनकाउंटर में ढेर, पत्नी भी मारी गई

आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई बड़ी मुठभेड़ में कुख्यात नक्सली कमांडर मादवी हिडमा और उसकी पत्नी ढेर हो गए। हिडमा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था और उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह मुठभेड़ अल्लूरी और सुकमा जिलों की सीमावर्ती जंगलों में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई, जब नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों मारे गए।
43 वर्षीय हिडमा पिछले दो दशकों से माओवादी संगठन का सबसे ताकतवर चेहरा माना जाता था। वह PLGA की बटालियन नंबर-1 का प्रमुख था और CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सबसे कम उम्र का सदस्य भी रहा। गहरे जंगलों में गुरिल्ला युद्ध की क्षमता, रणनीति बनाने की कुशलता और संगठन के भीतर पकड़ ने उसे शीर्ष कमांडरों की सूची में सबसे ऊपर रखा था।
छत्तीसगढ़ के सुकमा के पुवर्ती इलाके में जन्मे हिडमा ने कम उम्र में ही हथियार उठा लिए थे। वर्ष 2013 के दरभा घाटी नरसंहार में उसकी मुख्य भूमिका थी, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोग मारे गए थे। इसके अलावा 2017 में सुकमा में CRPF के 25 जवानों की शहादत वाले हमले का भी वह मास्टरमाइंड था। कुल मिलाकर उसने 26 से अधिक बड़े माओवादी हमलों को अंजाम दिया था।
मुठभेड़ में मारी गई उसकी पत्नी भी माओवादी संगठन की सक्रिय सदस्य थी और कई ऑपरेशनों में उसकी भूमिका रही थी। सुरक्षाबलों को हिडमा और उसकी टीम की मूवमेंट की जानकारी पहले से थी, जिसके आधार पर यह ऑपरेशन चलाया गया।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हिडमा की मौत माओवादी संगठन के लिए भारी झटका है। दक्षिण बस्तर में माओवादियों की पकड़ बनाए रखने में वह प्रमुख रणनीतिकार था। उसके मारे जाने से संगठन का नेटवर्क कमजोर होगा और क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करने में सुरक्षा बलों को और मजबूती मिलेगी।





