बिहार चुनाव में बढ़ा तनाव: NDA और महागठबंधन में सीट बंटवारे पर मचा घमासान, कई सीटों पर फ्रेंडली फाइट तय

बिहार विधानसभा चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। सीट बंटवारे को लेकर न तो सत्तारूढ़ एनडीए में सहमति बन पा रही है और न ही विपक्षी महागठबंधन में तालमेल दिख रहा है। टिकट वितरण में देरी और सहयोगी दलों के बीच खींचतान ने दोनों गठबंधनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
महागठबंधन में शामिल आरजेडी, कांग्रेस, वाम दलों और विकासशील इंसान पार्टी के बीच सीटों का फार्मूला तय नहीं हो पाया है। कांग्रेस कम से कम 65 सीटों की मांग पर अड़ी है, जबकि तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी 58 से अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं है। नतीजतन, कई सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ की स्थिति बन गई है। अनुमान है कि घोषी, मटिहानी, राजापाकड़, फुलवारी, कहलगांव, पालीगंज, मांझी, बछवाड़ा, तरारी और कुटुंबा जैसी करीब दस सीटों पर महागठबंधन के दो-दो उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।
दूसरी ओर, एनडीए खेमे में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) और जेडीयू के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी ने चिराग पासवान के उम्मीदवारों के खिलाफ सोनबरसा, गायघाट, राजगीर और एकमा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है। हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी भी नाराज चल रहे हैं और उन्होंने मखदुमपुर व बोधगया सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े कर दिए हैं।
इन हालातों में बिहार का राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। दोनों गठबंधनों में असंतोष की आग भड़क उठी है और कई वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर नाराजगी जताई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इन ‘फ्रेंडली फाइट’ सीटों पर मतदाता किसे अपना समर्थन देते हैं — अपने दल को या गठबंधन को। बिहार की सियासत इस बार वाकई ‘फ्रेंडली’ मुकाबलों से गरमाने वाली है।





