प्राचार्य पदोन्नति विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला जल्द

बिलासपुर:छत्तीसगढ़ में लेक्चरर से प्राचार्य पद पर पदोन्नति से जुड़े मापदंडों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई पूरी कर ली है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
बीच सुनवाई में उठे अहम मुद्दे
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेप याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने कई अहम मुद्दे उठाए।
इनमें प्रमुख रूप से:
- 20 वर्ष की सेवा और 50 वर्ष की आयु होने पर बीएड से छूट,
- प्रधान पाठक और लेक्चरर का कोटा,
- जूनियर शिक्षकों की पदोन्नति,
- प्रशासनिक पद के लिए बीएड अनिवार्यता नहीं होना – जैसे विषयों पर जोर दिया गया।
राज्य सरकार और टीचर्स एसोसिएशन ने रखा पक्ष
राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने सभी मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा।
वहीं टीचर्स एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता अनूप मजूमदार, अमृतोदास, विनोद देशमुख और जमील अख्तर ने हस्तक्षेप याचिका में लाभार्थियों की ओर से दलीलें पेश कीं।
11 जून से चल रही थी सुनवाई
11 जून से लगातार चल रही सुनवाई के दौरान मनोज सनाढ्य, रामगोपाल साहू, राजेश शर्मा, चंद्रशेखर गुप्ता और तोषण गुप्ता जैसे कई शिक्षक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
लेक्चरर से प्राचार्य पद पर पदोन्नति से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक याचिकाओं पर चली इस सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।





