हैकाथॉन 2.0 के जरिए FRA डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूती, जनजातीय मंत्रालय ने दिखाया एकीकृत मॉडल

जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के उद्देश्य से FRA डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केंद्रित हैकाथॉन 2.0 का आयोजन किया। नई दिल्ली स्थित नेशनल ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट में दो दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप के दौरान तकनीक, इनोवेशन और गवर्नेंस को एक साझा मंच पर लाने पर जोर दिया गया।

इस वर्कशॉप में स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2025 की पांचों फाइनलिस्ट टीमों के साथ मंत्रालय के अधिकारी, आईआईटी दिल्ली और एनआईसी के तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी टीमों के नवाचारों को एकीकृत कर एक ऐसा राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने पर चर्चा हुई, जिससे फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाई जा सके।

प्रस्तावित FRA डिजिटल प्लेटफॉर्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिजिटल आर्काइव, रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए FRA एटलस, नागरिक-केंद्रित चैटबॉट और नीति निर्माण में सहायक डिसीजन सपोर्ट सिस्टम जैसे फीचर्स शामिल हैं। इन सभी का उद्देश्य FRA से जुड़े रिकॉर्ड को सुलभ बनाना और जमीनी स्तर पर निगरानी को बेहतर करना है।

वर्कशॉप के अंतिम दिन एकीकृत FRA डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाइव डेमोंस्ट्रेशन किया गया, जिसमें यह दिखाया गया कि किस तरह यह सिस्टम अधिकारों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता ला सकता है। इस दौरान सभी पांच फाइनलिस्ट टीमों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्रालय की सचिव ने कहा कि ऐसी पहल की असली सफलता जमीनी समस्याओं के समाधान में निहित होती है। उन्होंने कहा कि फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत भूमि अधिकार केवल कानूनी मान्यता ही नहीं, बल्कि सम्मान और आजीविका के अवसर भी प्रदान करते हैं।

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिक-केंद्रित डिजाइन और उपयोगकर्ता की जरूरतों को प्राथमिकता देने पर बल दिया। साथ ही यह भी बताया गया कि इस पहल से सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और जनजातीय समुदायों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

राष्ट्रीय वर्कशॉप से पहले छात्र टीमों ने महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल क्षेत्रों का जमीनी दौरा कर फॉरेस्ट राइट्स कमेटियों से संवाद किया और वास्तविक चुनौतियों को समझा। मंत्रालय का मानना है कि यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म डेटा आधारित शासन और सहभागी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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