छत्तीसगढ़ में पहली बार: गंगरेल, गिधवा परसदा और मांढर को बनाया जाएगा रामसर साइट

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार छह जलाशयों को रामसर साइट के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। राजधानी रायपुर से 22 किमी दूर मांढर जलाशय सहित गंगरेल, कोपरा, गिधवा परसदा, कुरंदी और नीमगांव जलाशय को चिन्हित किया गया है। इन स्थलों पर सर्वे कर यह देखा जाएगा कि यहां कितनी प्रजातियों के पक्षी आते हैं, कितने विलुप्तप्राय हैं और कितने समय तक ये वेटलैंड पक्षियों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
मंगलवार को नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में वन मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में राज्य वेटलैंड प्राधिकरण की तीसरी बैठक आयोजित हुई। बैठक में सभी जिलों की वेटलैंड संरक्षण समितियों को संरक्षण और संवर्धन के स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही अन्य राज्यों के वेटलैंड प्राधिकरणों के वित्तीय अधिकारों का अध्ययन कर संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजने का निर्णय हुआ।
बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्ही. श्रीनिवास राव, सचिव वन अमरनाथ प्रसाद, राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक अनिल साहू सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अपर मुख्य सचिव वन ऋचा शर्मा ने निर्देश दिए कि दो माह के भीतर सभी वेटलैंड संबंधी डाटा राज्य की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए और 15 दिनों में जिला समितियां ग्राउंडट्रूथिंग व डिमार्केशन का काम पूरा करें।
रामसर साइट उन आर्द्रभूमियों को कहा जाता है जहां कम से कम 20 हजार से अधिक पक्षी आते हैं और उन्हें भोजन व सुरक्षा मिलती है। घोषित होने के बाद इन स्थलों पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रतिबंधित होता है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में एक भी रामसर साइट नहीं है, जबकि भारत में इनकी संख्या 91 है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि राज्य के वनवासियों की आय बढ़ाने में भी सहायक होगी।





