महासमुंद में फूलों की खेती बनी किसानों की नई उम्मीद

महासमुंद जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती को भी अपनाने लगे हैं। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ रही है, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। जिले के ग्राम बकमा के दुष्यंत चंद्राकर इसका एक शानदार उदाहरण हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर फूलों की खेती की ओर रुख किया और आज चार से पांच एकड़ में गेंदा, रजनीगंधा और अन्य फूलों की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा, वह 20 एकड़ जमीन पर धान की फसल भी लगाते हैं।

फूलों की खेती से लाखों की कमाई

दुष्यंत चंद्राकर की मेहनत और सोच का ही नतीजा है कि वह सालाना चार से पांच लाख रुपए सिर्फ फूलों की खेती से कमा रहे हैं। उनकी इस सफलता से प्रेरित होकर आसपास के किसान भी अब फूलों की खेती करने लगे हैं। उनका कहना है कि इस खेती से लगभग 40 से 50 लोगों को रोजगार भी मिला है। दुष्यंत ने बीएससी तक पढ़ाई की है और अब आधुनिक तरीकों से खेती कर रहे हैं।

देशभर में बढ़ रही है फूलों की मांग

महासमुंद के किसानों को फूलों की खेती से अच्छा मुनाफा मिल रहा है क्योंकि इनकी मांग सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बल्कि नई दिल्ली, मुंबई, नागपुर, अहमदाबाद, जयपुर और उड़ीसा जैसे बड़े शहरों में भी है। बाजार में फूलों की अच्छी कीमत मिलने से किसान अब इस खेती को एक लाभदायक विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

सरकार भी कर रही मदद

छत्तीसगढ़ सरकार भी किसानों को फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सरकार की योजनाओं के तहत किसानों को सहायता राशि, प्रशिक्षण और तकनीकी मदद दी जा रही है ताकि वे कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकें।

नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा महासमुंद

फूलों की खेती अब महासमुंद जिले में किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का नया जरिया बन रही है। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। कुल मिलाकर, यह खेती किसानों के लिए एक नई रोशनी लेकर आई है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही है।

 

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