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कोंडागांव में सूरजमुखी की खेती से किसानों की बदल रही जिंदगी

कोंडागांव जिले में किसानों की मेहनत अब रंग ला रही है। यहां के खेतों में सूरजमुखी के पीले फूलों की मुस्कान बिखर रही है, जिससे किसानों की जिंदगी भी रोशन हो रही है। यह बदलाव सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम भी है।

नई पहल: सूरजमुखी की खेती से नई उम्मीद

प्रदान संस्था ने कोंडागांव के कई गांवों में सूरजमुखी की खेती को बढ़ावा देने के लिए पहल शुरू की है। इस अभियान के तहत चिचपोलंग, पुषपाल, मटवाल, बावड़ी, बेतबेडा, बनउसरी, मोहलाई और सिलाटी के 250 किसानों ने 200 एकड़ जमीन पर सूरजमुखी की खेती शुरू की है।

ग्राम बावड़ी की बायको और अनीता मरकाम ने पहली बार 2 एकड़ में सूरजमुखी बोई है, जबकि प्रवति, आसमती, मंगल और सुकमन जैसे किसान भी इस खेती से जुड़ रहे हैं। यह फसल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।

कम पानी में ज्यादा मुनाफा

सूरजमुखी की खेती उन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है जो पानी की कमी से जूझ रहे थे। यह फसल कम पानी में भी अच्छी उपज देती है और इससे निकलने वाला तेल बाजार में हमेशा मांग में रहता है।

प्रति एकड़ 5-6 क्विंटल सूरजमुखी बीज मिल रहा है।

इससे करीब 200 लीटर तेल निकाला जा सकता है।

किसानों को प्रति एकड़ 20,000 रुपये तक की आमदनी हो रही है।

महिलाओं की बड़ी भागीदारी

कोंडागांव में सूरजमुखी की खेती सिर्फ पुरुष किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की भी इसमें अहम भागीदारी है। यहां के छह गांवों में महिला समूहों को तेल निकालने के लिए आयल एक्सपेलर मशीनें दी गई हैं। इससे महिलाएं खुद तेल निकालकर उसे बाजार तक पहुंचा रही हैं।

ग्राम चिचपोलंग, पुषपाल, मटवाल, बावड़ी, बेतबेडा और सिलाटी में महिला स्वयं सहायता समूह इस काम में जुटे हैं। इससे उन्हें न सिर्फ आर्थिक मजबूती मिल रही है, बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बन रही हैं।

प्रदान संस्था, जो देश के नौ राज्यों में काम कर रही है, ने इस पहल में अहम भूमिका निभाई है। 2021 से संस्था ने कोंडागांव में किसानों की आजीविका सुधारने और जल प्रबंधन पर काम करना शुरू किया।

संस्था जिला प्रशासन के साथ मिलकर हाई इंपैक्ट मेगा वाटरशेड परियोजना 2.0 में भी काम कर रही है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी की समस्या से निजात मिलेगी।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

कोंडागांव के किसानों और महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि सही प्रयास किए जाएं तो आत्मनिर्भरता संभव है। सूरजमुखी की खेती ने न सिर्फ उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का हौसला भी दिया है।

 

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