नकली देसी अंडों का रैकेट बेनकाब, 80 हजार से अधिक अंडे जब्त, गोदाम सील

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हजारों साल पुरानी विश्वसनीय देसी अंडा आपूर्ति श्रृंखला में सेंध लगाने वाले बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने काशीपुर रोड स्थित गोदाम पर छापा मारकर 45,360 रंगे हुए और 35,640 सफेद अंडे जब्त किए, जिनकी संयुक्त अनुमानित कीमत लगभग ₹4.5 लाख आंकी गई है। शुरुआती जांच में सामने आया कि सफेद अंडों पर खतरनाक रसायनों और कृत्रिम रंगों से पॉलिश कर उन्हें “देसी अंडा” बताकर बाजार में दोगुने दाम पर बेचने की तैयारी चल रही थी।
देसज अंडों की बढ़ती मांग और प्रीमियम मूल्य का फायदा उठाकर आरोपी लंबे समय से इस धंधे को संचालित कर रहे थे। स्थानीय सराफा, कपड़ा और खाद्य बाजारों में देसी अंडे सामान्य सफेद अंडे की तुलना में लगभग दोगुनी कीमत तक बिकते हैं, जिससे मुनाफे का लालच मिलावटखोरी रैकेट के लिए बड़ा प्रोत्साहन बना।
अधिकारियों की निगरानी में हुई कार्रवाई
यह छापेमारी सहायक आयुक्त (खाद्य) के निर्देशन और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई करने वाली टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के.के. यादव और प्रजन सिंह शामिल रहे। मौके पर गोदाम मालिक श्री अल्लाह खां उपस्थित मिला, जिसके खिलाफ कटघर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया और संपूर्ण गोदाम को सील कर दिया गया।
केमिकल भी मिलावटी? लैब रिपोर्ट का इंतजार
अंडों की रंगाई–पॉलिश में उपयोग किए जा रहे मिलावटी केमिकल और अन्य रासायनिक पदार्थ (adulterants) भी मौके से जब्त किए गए। रंगों और रसायनों के नमूने परीक्षण के लिए लैब भेज दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस केमिकल की संरचना और घातकता रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी। विभाग को आशंका है कि अंडों को रंगने में इस्तेमाल हो रहा केमिकल खुद भी मिलावटी और अधिक हानिकारक हो सकता है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक जोखिम पैदा कर सकता था।
उपभोक्ता सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
विभाग के मुताबिक, ज्वालामुखीय राख जितनी महीन नहीं, लेकिन रासायनिक पॉलिश में प्रयुक्त कण और रंग मानव शरीर में प्रवेश कर कई गंभीर दुष्प्रभाव उत्पन्न कर सकते थे—जिनमें गैस्ट्रिक संक्रमण, हार्मोन असंतुलन, एलर्जी और न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। डॉक्टरों और खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंडा जैसे उच्च उपभोग वाले उत्पाद में मिलावट बड़े स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती थी।
निरंतर अभियान का ऐलान
खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में मिलावटखोरी, नकली खाद्य उत्पादों और संगठित खाद्य धोखाधड़ी के खिलाफ निरंतर और अप्रत्याशित (surprise) छापेमारी अभियान जारी रहेगा। विभाग ने खरीदारों से भी अपील की है कि वे देसी अंडा खरीदते समय विश्वसनीय विक्रेता, गुणवत्ता जांच और गंध/सतही बनावट जैसे मूल संकेतों पर विशेष ध्यान दें और अगर कुछ संदिग्ध लगे तो तुरंत सूचना दें।
रैकेट के उजागर होने के बाद स्थानीय बाजारों में हड़कंप का माहौल है। प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आगे सख्त धाराओं में कार्रवाई बढ़ाई जा सकती है और सप्लाई नेटवर्क की भी मैपिंग की जा रही है कि आखिर ये “पॉलिशेड देसी अंडे” किन-किन बाजारों तक पहुंचने वाले थे।





