हड़ताली पंचायत सचिवो की जगह रोजगार सहायक निपटाएंगे काम..

बिलासपुर
छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब गांव-गांव तक दिखने लगा है। ग्राम पंचायत चुनावों के बाद नव-निर्वाचित सरपंचों को जैसे ही कामकाज संभालने का मौका मिला, पंचायत सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से योजनाओं की गति थम गई। ऐसे में प्रशासन ने वैकल्पिक कदम उठाते हुए पंचायतों में सचिव की जिम्मेदारी अब रोजगार सहायकों को सौंप दी है।
शासकीयकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर सचिव
17 मार्च से प्रदेश के 11,658 पंचायत सचिव और सिर्फ जिले में 483 सचिव अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उनकी एक सूत्रीय मांग है – शासकीयकरण। सचिव संघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन के कारण पंचायतों में न सिर्फ प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए हैं, बल्कि कई योजनाओं की भी रफ्तार थम गई है।
जिला प्रशासन ने लिया फैसला, नहीं रुकेंगे शासकीय काम
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ संदीप कुमार अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 69(1) के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए आगामी आदेश तक रोजगार सहायकों को पंचायत सचिव का प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया है।
उन्होंने कहा “सचिवों के हड़ताल पर होने के कारण ग्राम पंचायतों में कामकाज प्रभावित हो रहा था। इस स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत रोजगार सहायकों को प्रभार दिया गया है, ताकि शासकीय योजनाओं का संचालन सुचारू रूप से हो सके और आमजन को असुविधा न हो।”
ग्राम पंचायतों में दिख रहा असर
पंच, सरपंच और ग्रामीण विकास योजनाओं से जुड़े कामकाज में रुकावट आ रही थी। मिड-डे मील, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाएं प्रभावित हो रही थीं। रोजगार सहायकों को सचिव का अतिरिक्त प्रभार मिलने से अब इन योजनाओं को फिर से गति मिलने की उम्मीद है।
आर-पार के मूड में सचिव
इस बार सचिव संघ पूरी मजबूती से सरकार के सामने अपनी मांग रख रहा है। सचिवों का कहना है कि जब तक उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाएगा, वे पीछे नहीं हटेंगे।





