भाजपा सांसदों ने भी दूसरे राज्यों में खर्च की सांसद निधि, MPLADS पर दोहरा मापदंड उजागर

जयपुर। राजस्थान के कांग्रेस सांसदों द्वारा अपने क्षेत्र से बाहर सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLADS) खर्च करने पर भाजपा ने सवाल उठाए थे। लेकिन अब सामने आई जानकारी से साफ हो गया है कि सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि भाजपा के सांसदों ने भी दूसरे राज्यों में अपने सांसद कोष से राशि जारी की है।
सूची में भाजपा के चार राज्यसभा सांसदों और एक केंद्रीय मंत्री का नाम शामिल है। इन सांसदों ने राजस्थान से बाहर विभिन्न राज्यों में जनहित के कार्यों के लिए सांसद निधि का उपयोग किया है।
जानकारी के अनुसार, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में धर्मशाला विकास के लिए 5 लाख रुपए और उत्तर प्रदेश के अयोध्या में सोलर पैनल लगाने के लिए 20 लाख रुपए जारी किए।
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हरियाणा के करनाल और पंजाब के अमृतसर व जालंधर में करीब 20 लाख रुपए सांसद कोष से खर्च किए, जो अस्पताल, स्कूल और ट्रस्ट से जुड़े कार्यों में लगाए गए।
राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और शाहजहांपुर में एलईडी लाइट लगाने के लिए 49 लाख रुपए दिए।
वहीं, राज्यसभा सांसद राजेन्द्र गहलोत ने उत्तर प्रदेश के आगरा में वाटर टैंक और हाईमास्ट लाइटों के लिए राशि जारी की। इसके अलावा मऊ जिले में एक बच्चे को सुनने की मशीन भी सांसद निधि से दिलाई गई।
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद संजना जाटव ने कहा कि जब भाजपा सांसद भी दूसरे राज्यों में सांसद निधि खर्च कर रहे हैं, तो केवल कांग्रेस सांसदों पर सवाल उठाना गलत है। उन्होंने इसे भाजपा का दोहरा मापदंड बताया।
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसदों ने अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए सांसद निधि का दुरुपयोग किया है। उनका कहना है कि सांसद निधि का मकसद जनता की मदद करना है, न कि राजनीतिक लाभ लेना।
नियमों के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा सांसद एक वित्तीय वर्ष में अपने सांसद कोष से अधिकतम 50 लाख रुपए तक की राशि दूसरे राज्यों में खर्च कर सकते हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह बहस जारी है कि जब अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की जरूरत बनी रहती है, तो दूसरे राज्यों में सांसद निधि खर्च करना कितना उचित है। इसे लेकर नैतिकता पर भी सवाल उठने लगे हैं।





