क्या एक साथ रहने से लड़कियों के पीरियड्स सिंक्रनाइज़ हो जाते हैं?

क्या आपने कभी सुना है कि अगर लड़कियां एक ही हॉस्टल या घर में साथ रहती हैं, तो उनके पीरियड्स धीरे-धीरे एक साथ आने लगते हैं? यह धारणा वर्षों से चली आ रही है, लेकिन क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक सच्चाई है या यह सिर्फ एक आम मिथ है? आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से।
कहां से शुरू हुई यह बात?
1971 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्चर मार्था मैक्लिंटॉक ने एक रिसर्च लेटर प्रकाशित किया। इसमें उन्होंने दावा किया कि 135 कॉलेज स्टूडेंट्स, जो एक ही हॉस्टल में रहती थीं, उनके पीरियड्स समय के साथ सिंक्रनाइज़ हो गए। उन्होंने इसकी वजह फेरोमोन्स (रासायनिक संकेत) को बताया।
फेरोमोन्स इंसानों में सूंघे न जा सकने वाले केमिकल होते हैं जो शरीर से निकलते हैं और दूसरों के हार्मोनल व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। मैक्लिंटॉक के मुताबिक, जब महिलाएं लंबे समय तक एक साथ रहती हैं, तो उनके शरीर से निकलने वाले फेरोमोन्स एक-दूसरे के मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकते हैं।
लेकिन क्या विज्ञान इससे सहमत है?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और Clue ऐप की स्टडी (2017)
1500 महिलाओं पर रिसर्च 360 जोड़ियों की जांच की गई,273 जोड़ियों में पीरियड्स की तारीखें दूर हुईं, सिर्फ 79 जोड़ियों में तारीखें करीब आईं
निष्कर्ष: पीरियड्स सिंक्रनाइज़ेशन का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं मिला।
चीनी कॉलेज स्टूडेंट्स पर स्टडी (2006)
186 छात्राएं, 4–8 के ग्रुप में डोरमेट्री में रहीं, 1 साल तक डेटा रिकॉर्ड किया गया
निष्कर्ष: पीरियड्स में समानता महज संयोग था। कोई स्पष्ट सिंक्रनाइज़ेशन नहीं मिला।
भारतीय मेडिकल स्टूडेंट्स पर स्टडी (2023)
62 छात्राएं, दो-दो के ग्रुप में हॉस्टल में,13 महीनों तक स्टडी, 54.8% जोड़ियों में पीरियड्स की तारीखें करीब आईं
निष्कर्ष: कुछ हद तक सिंक्रनाइज़ेशन के संकेत मिले, लेकिन फेरोमोन्स को वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं किया जा सका।
तो क्या यह सच है या सिर्फ भ्रम?
हर महिला का मासिक धर्म चक्र अलग होता है, जो 21 से 40 दिनों तक हो सकता है।
अगर दो महिलाओं के चक्र अलग-अलग हैं, तो कभी-कभी उनका समय मेल खा सकता है, लेकिन यह एक गणितीय संयोग है।
हम उन मौकों को ज्यादा याद रखते हैं जब पीरियड्स मेल खा जाते हैं, और अनमेल होने की घटनाएं अनदेखी रह जाती हैं।





