बीएमसी में मेयर पद को लेकर मंथन तेज, शिंदे गुट ने रखा ढाई-ढाई साल का प्रस्ताव

महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों के बाद मुंबई महानगर पालिका में मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है। इसके साथ ही ठाकरे परिवार का बीएमसी पर दशकों पुराना दबदबा खत्म हो गया है। अब बीजेपी की नजर मुंबई का मेयर बनाने पर है, जबकि सहयोगी शिंदे गुट ने इसके लिए अपना फॉर्मूला सामने रखा है।

सूत्रों के मुताबिक शिंदे गुट चाहता है कि मेयर पद का कार्यकाल ढाई-ढाई साल के लिए बांटा जाए। प्रस्ताव के तहत पहले ढाई साल बीजेपी का मेयर और शेष ढाई साल शिवसेना (शिंदे गुट) का मेयर हो। शिंदे गुट के कई मंत्री और नेता इस पद पर दावा जता रहे हैं और वे इस फॉर्मूले को लेकर पार्टी प्रमुख एकनाथ शिंदे के जरिए बीजेपी से बातचीत की कोशिश में हैं। हालांकि बीजेपी की ओर से अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक सहमति नहीं दी गई है।

मुंबई में मेयर का चयन महाराष्ट्र के नगर विकास मंत्रालय द्वारा तय लॉटरी सिस्टम से किया जाएगा। बीएमसी सहित सभी महानगरपालिकाओं के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी, जिससे यह तय होगा कि मेयर पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। अगर लॉटरी में जनरल कैटेगरी आती है, तो उसी श्रेणी के निर्वाचित पार्षद को मेयर चुना जाएगा। यही प्रक्रिया अन्य मनपाओं में भी लागू होगी।

बीएमसी चुनाव में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बड़ा झटका दिया है। इस हार के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। उद्धव गुट के सांसद संजय राउत ने एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला करते हुए उन्हें शिवसेना का जयचंद तक बता दिया है।

मेयर पद को लेकर जारी मंथन और लॉटरी सिस्टम के चलते आने वाले दिनों में मुंबई की राजनीति और गर्माने के आसार हैं। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी शिंदे गुट के ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले को स्वीकार करती है या नहीं।

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