दिव्यांग सरकारी कर्मचारी फुटपाथ पर रहने को मजबूर, प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम

बिलासपुर।न्यायधानी बिलासपुर से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनसंपर्क विभाग में कार्यरत दिव्यांग सरकारी कर्मचारी भानु प्रताप खेस आज इलाज और रोज़ी-रोटी के लिए मोहताज होकर जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर फुटपाथ पर रहने को मजबूर हैं।
भानु प्रताप खेस, जो न्यू कंपोजिट बिल्डिंग के पास फुटपाथ पर रह रहे हैं, ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि इस दौरान उनका लंबित वेतन जारी नहीं किया गया, तो वे कलेक्टर कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे।
पीड़ित कर्मचारी ने बताया कि पिछले 28 महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है। एक सड़क दुर्घटना में एक पैर से दिव्यांग होने के बाद भी विभाग की ओर से उन्हें कोई ठोस सहायता नहीं दी गई। न तो उन्हें कोई वैकल्पिक कार्य सौंपा गया और न ही उनके वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) आवेदन पर कोई निर्णय लिया गया।
इलाज के लिए पैसे नहीं, सिर पर बैंक का कर्ज और खाने तक की समस्या—इन हालातों में एक सरकारी कर्मचारी का सड़क पर सोना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। भानु प्रताप खेस ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को भी मजबूर हो सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन समय रहते इस पीड़ा को समझेगा और समाधान निकालेगा, या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही हरकत में आएगा।





