दिवाली पर दिल्ली की हवा हुई सबसे जहरीली, चार साल में टूटा प्रदूषण का रिकॉर्ड

दिवाली के मौके पर रोशनी के साथ-साथ राजधानी दिल्ली की हवा में भी धुंध और जहरीले कणों का घना बादल छा गया। इस बार दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) चार साल में सबसे खराब स्तर पर पहुंच गया। दीपों के त्योहार पर रात भर पटाखे फूटे और साथ ही पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं ने हालात को और बिगाड़ दिया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार शाम 4 बजे दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 345 दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। पिछले साल 2024 में यह आंकड़ा 330, 2023 में 218 और 2022 में 312 रहा था। रात भर प्रदूषण का स्तर बढ़ता गया और देर रात AQI 349 तक पहुंच गया। मंगलवार सुबह भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ और सूचकांक 351 से 359 के बीच बना रहा।
वहीं, पीएम 2.5 का स्तर भी इस बार रिकॉर्ड ऊंचाई पर रहा। आधी रात को यह 675 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया, जो सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है। साल 2024 में पीएम 2.5 का स्तर 609, 2023 में 570 और 2022 में 534 दर्ज किया गया था। हवा की गति धीमी होने से प्रदूषक फैल नहीं पाए और पूरी दिल्ली पर धुंध की चादर छा गई।
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर केवल “ग्रीन पटाखों” को रात 8 से 10 बजे तक जलाने की अनुमति दी थी, लेकिन कई इलाकों में देर रात तक पटाखे फूटते रहे। इसके अलावा परिवहन क्षेत्र का प्रदूषण में 14.6% योगदान रहा। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और पराली जलाने वाले क्षेत्रों ने भी दिल्ली की हवा को और जहरीला बना दिया।
पंजाब में पराली जलाने की 45, हरियाणा में 13 और उत्तर प्रदेश में 77 घटनाएं दर्ज की गईं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बने दबाव के कारण हवा की गति कम हुई, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। हालांकि, आने वाले दिनों में हवा की रफ्तार बढ़ने से स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।





