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बड़े अधिकारी AC चैंबर छोड़ने को तैयार नहीं… IAS कोचिंग हादसे पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, MCD कमिश्नर को किया तलब

दिल्ली कोचिंग हादसे के मामले पर हाई कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई है. इस बीच हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एमसीडी को जमकर फटकार लगाई है. कोर्ट ने पूछा है कि आपके पास नाले और नालियों की साफ-सफाई का कोई प्लान है, आखिर ऐसी घटना क्यों हुई? दिल्ली सरकार के वकील ने घटना से पहले की परिस्थितियों के बारे में बताया. साथ ही साथ कहा कि निरीक्षण की फाइलें तुरंत अधिकारियों को भेज दी गईं.

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जांच कौन इंवेस्टीगेशन अधिकारी कर रहा है? ये चौंकाने वाली जांच है.आखिर इतना पानी कैसे आया? दिल्ली सरकार से हाईकोर्ट ने कहा कि आपके आधिकारी दिवालिया हैं. आपके पास वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, आप दिल्ली का इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे अपग्रेड करेंगे? आप तो फ्रीबी कल्चर चाहते हैं.

हाई कोर्ट ने कहा हम इस मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए आदेश पारित करेंगे. यह ढांचागत खामी है और इसे किसी वैधानिक तंत्र के पास जाना चाहिए. बहुत सारे अधिकारी काम कर रहे हैं, दुर्भाग्य से विपरीत उद्देश्यों के लिए. बहुत सारा आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है. दिल्ली के पूरे प्रशासनिक ढांचे की दोबारा जांच की जरूरत है. दिल्ली हाई कोर्ट शुक्रवार को आगे सुनवाई करेगा.

दिल्ली हाई कोर्ट ने MCD कमिश्नर को तलब किया है. शुक्रवार को अगली सुनवाई के दौरान दोपहर 2:30 बजे उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट ने सरकार से कहा है कि कल तक हलफनामा दें कि क्या कदम उठाएं हैं.

MCD के वकील ने कहा कि कुछ एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. कोर्ट ने कहा कि तुमने जूनियर अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया है पर जिन बड़े अधिकारियों की निगरानी की जिम्मेदारी है, उन पर क्या किया. कोर्ट ने कहा कि बड़े अधिकारी अपने एसी चैंबर छोड़कर बाहर जाने को तैयार नहीं. अगर आपको लगता है कि बिल्डिंग बनाकर प्रकृति से लड़ लेंगे, तो गलत है. ये नहीं हो सकता. एक दिन सूखे से परेशान होते हो और अगले दिन बाढ़ से.

कोर्ट ने कहा कि इस फ्रीबीज संस्कृति का भी आपको पता होगा. सवा तीन करोड़ की आबादी है, जबकि ये 6/7 लाख की आबादी के लिए प्लानड़ शहर था. बिना बुनियादी ढाँचा सुधारे कैसे इतनी आबादी रह सकती है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि ये एक तरह की रणनीति है, जहां किसी को जिम्मेदार नहीं बताया जाता. हमें ये पता करना होगा कि कहां किसकी जिन्मेदारी है. अगर जांच अधिकारी ने ठीक से जांच नहीं की, तो हम किसी केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंप देंगे.

इससे पहले याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा राजेंद्र नगर में जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण से भी अधिक है. 2019 में होटल में आग लगने से एक IRS, एक विदेशी की मौत हो गई थी. वहीं, कुछ महीने पहले मुखर्जी नगर की कोचिंग में आग की घटना और नर्सिंग होम में आग लगी थी.

‘कार्रवाई की जाती तो जान बच सकती थी’

उसने कहा कि साल 2023 में अदलात ने MCD और अन्य स्थानीय अधिकारियों को निर्देश भी जारी किया था लेकिन एक साल बीत गया लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि इस साल 26 जून को राव IAS के अवैध संचालन के संबंध में प्रशासन को एक पत्र भेजा गया था, लेकिन उस पर भी कोई कदम नहीं उठाया गया. अगर समय पर कार्रवाई की गई होती तो उन तीन लोगों की जान बचाई जा सकती थी. रिहायशी इलाकों में बेसमेंट में कई लाइब्रेरी चल रही हैं, लेकिन पता नहीं क्यों MCD शांत है?

याचिकाकर्ता ने कहा कि इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है कि अखिर किस चीज ने अधिकारियों को कार्रवाई करने से रोका? वहीं, 2023 मे पटेल नगर में एक युवक की करंट लगने से मौत होने पर दाखिल याचिका पर अभी तक कोई जवाब नहीं दाखिल किया गया. दिल्ली के पटेल नगर, करोल बाग, राजेंद्र नगर में बहुत सी बहुमंजिला इमारतें हैं. एक इमारत में करीब 50-60 छात्र रह रहे हैं. यहां तक ​​की बेसमेंट में भी छात्रों के PG चल रहे हैं. प्रत्येक क्षेत्र में अवैध निर्माण को रोकने के लिए MCD की ओर से व्यक्ति नियुक्त हैं, लेकिन वे काम नहीं कर रहे हैं.

‘फायर डिपार्टमेंट जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहा’

याचिकाकर्ता ने कहा कि MCD फायर डिपार्टमेंट जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहा है. जिला स्तर के अधिकारी को जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए. रिहायशी इलाकों में बेसमेंट में कई लाइब्रेरी चल रही हैं, लेकिन पता नहीं कि एमसीडी शांत क्यों है? वहां कई मौजूदा आयुक्तों की संपत्ति है. यह एक कड़वा सच है. वहीं, दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि इमारतों की प्रकृति के कारण कोचिंग सेंटरों के लिए अनुमतियां दी गई थीं. भंडारण के लिए बेसमेंट का उपयोग किया जा सकता है और निरीक्षण के बाद अग्निशमन सेवा की मंजूरी लेनी होगी. उन्होंने कहा कि अधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं. करीब 75 संस्थानों को नोटिस जारी किए गए.

दिल्ली सरकार ने कहा कि 35 बंद कर दिए गए और 25 को सील कर दिया गया. फिलहाल हम किसी बात को उचित नहीं ठहरा रहे हैं, लेकिन जो स्थिति है वह की कार्रवाई की जा रही है. हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि कोचिंग सेंटर के खिलाफ कदम उठाया गया. एमसीडी के अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाया? याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह पूरी तरह से आपराधिक लापरवाही है.

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