महिला आरक्षण मुद्दे से बदले समीकरण, बंगाल में कांग्रेस-टीएमसी के रिश्तों में आई नरमी

पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा राजनीति में नया मोड़ ले आया है। इस मुद्दे की वजह से पहले एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक रही कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के रिश्तों में अब नरमी देखने को मिल रही है।
शुरुआत में कांग्रेस ने टीएमसी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। राहुल गांधी ने अपनी रैलियों में बीजेपी के साथ-साथ ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा था।
कैसे बदला माहौल?
महिला आरक्षण बिल और परिसीमन के मुद्दे पर टीएमसी ने कांग्रेस का साथ दिया। बताया जा रहा है कि टीएमसी ने संसद में ज्यादा सांसद भेजकर बिल के खिलाफ वोटिंग में हिस्सा लिया। इसके बाद दोनों पार्टियों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने लगी।
बिल गिरने के बाद सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को फोन कर धन्यवाद दिया, वहीं राहुल गांधी ने अभिषेक बनर्जी से बात की।
प्रचार में भी दिखा बदलाव
इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के बड़े नेताओं ने बंगाल में अपने प्रचार को सीमित कर दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के कई कार्यक्रम रद्द हो गए। वहीं मल्लिकार्जुन खरगे ने भी अपने भाषणों में टीएमसी पर हमला कम कर दिया और ज्यादा ध्यान बीजेपी पर रखा।
अंदरूनी असहजता भी सामने आई
हालांकि, कांग्रेस के कुछ नेता इस बदलाव से असहज हैं। अधीर रंजन चौधरी जैसे नेता, जो लंबे समय से ममता बनर्जी के विरोधी रहे हैं, इस नए रुख से खुश नजर नहीं आ रहे।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण के मुद्दे ने बंगाल की राजनीति में नया समीकरण बना दिया है, जिससे चुनावी रणनीतियों पर भी असर पड़ा है।





