कांग्रेस ने किया “सुशासन तिहार” पर हमला, छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विवाद

छत्तीसगढ़ प्रदेश में “सुशासन तिहार” के आयोजन को लेकर बिलासपुर में राजनीतिक पारा गरमा रहा है। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम पर तंज कसते हुए प्रदेश में अराजकता का माहौल बताया है। कांग्रेस नेताओं ने हाल ही में दुर्ग में हुई घटना का हवाला देते हुए सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। अब जिला कांग्रेस कमिटी जल्द ही सुशासन तिहार के खिलाफ आंदोलन करने की योजना बना रही है।

प्रदेश में इन दिनों “सुशासन तिहार” की चर्चा जोरों पर है। सरकार ने ये विशेष अभियान इसलिए चलाया है, ताकि आम जनता प्रशासन से सीधे जुड़ सके और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। इस दौरान सभी सरकारी कार्यालयों में आवेदन पेटियां लगाई गई हैं, जिनमें लोग अपनी समस्याओं के आवेदन डाल सकते हैं। 8 से 11 अप्रैल तक प्रदेशवासी आवेदन कर सकते हैं, और इसके बाद 5 से 31 मई तक समाधान शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें समस्याओं का समाधान ऑन स्पॉट किया जाएगा।

बिलासपुर कलेक्टर अवनीश कुमार शरण,का कहना है की यह पहल जनता और शासन के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि हम लोगों के मुद्दों का त्वरित समाधान कर सकें।

सरकार का दावा है कि यह पहल जनता और शासन के बीच भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसे लेकर अब सियासी सुर भी उठने लगे हैं। विपक्ष ने सुशासन तिहार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बीजेपी को “सुशासन तिहार” की जगह “कुशासन तिहार” मानना चाहिए। कांग्रेस ने पेट्रोल और गैस की कीमतों में वृद्धि और दुर्ग में हुई अमानवीय घटना पर जोर देते हुए कहा कि इस परिस्थिति में सुशासन पखवाड़ा मानना सर्वथा अनुचित है।

वही प्रमोद नायक, कांग्रेस नेता कहा की राज्य में बढ़ती महंगाई और हाल में हुई घटनाओं के बावजूद सरकार सुशासन तिहार मना रही है, यह बेहद अनुचित है। यह सरकार की नाकामी को छुपाने का प्रयास है।”

भाजपा ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस की जमीन खिसक चुकी है। अपने कुकर्मों के कारण कांग्रेस की सरकार चली गई। छत्तीसगढ़ और देश भर में कांग्रेस की जो हालत हुई है, वह बीजेपी के “सुशासन” की वजह से हुई है। छत्तीसगढ़ में सुशासन का प्रमाणपत्र जनता ने नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में बीजेपी को दे दिया है।

बहरहाल, “सुशासन तिहार” अब सिर्फ राज्य सरकार का प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि एक सियासी मुद्दा भी बनता जा रहा है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जिलेभर में इस आयोजन के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा, जिसका नाम कांग्रेस “कुशासन तिहार” रख सकती है।

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