रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू, संजीव शुक्ला बने पहले पुलिस कमिश्नर, 15 आईपीएस अफसरों का तबादला

रायपुर में कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। वर्ष 2004 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजीव शुक्ला को रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे बिलासपुर रेंज में आईजी के रूप में सेवाएं दे रहे थे।

श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को रायपुर ग्रामीण का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। अमित तुकाराम कांबले को कांकेर से स्थानांतरित कर रायपुर नगरीय में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। वहीं रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह को जशपुर भेजा गया है।

जशपुर के एसएसपी शशिमोहन सिंह को रायगढ़ और रामगोपाल गर्ग को बिलासपुर रेंज का आईजी बनाया गया है। अभिषेक शांडिल्य को दुर्ग रेंज आईजी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बालाजी राव सोमावर को राजनांदगांव रेंज का आईजी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा अन्य अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं।

कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के बाद रायपुर में नगरीय पुलिस ढांचे को मजबूत करने के लिए पुलिस उपायुक्त स्तर पर नई नियुक्तियां की गई हैं। उमेश प्रसाद गुप्ता को डीसीपी मध्य, संदीप पटेल को डीसीपी पश्चिम और मयंक गुर्जर को डीसीपी उत्तर की जिम्मेदारी दी गई है। विकास कुमार को ट्रैफिक और प्रोटोकॉल तथा राजनाला स्मृतिक को क्राइम और साइबर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

रायपुर जिले के आधे हिस्से में कमिश्नरी सिस्टम लागू किया गया है। जिले के 21 थाने कमिश्नर के अंतर्गत और 12 थाने एसपी के अधीन रहेंगे। जिले को दो हिस्सों में बांटकर नई व्यवस्था लागू की गई है।

भोपाल और इंदौर मॉडल की तर्ज पर इस व्यवस्था को लागू किया गया है। हालांकि, इसे पूरे जिले में लागू नहीं किए जाने को लेकर कुछ अधिकारियों ने असंतोष भी जताया है। अधिकारियों का कहना है कि दोहरी व्यवस्था से प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

कुछ आईपीएस अधिकारियों का मानना है कि सीमाओं का निर्धारण मनमाने ढंग से किया गया है, जिससे असंतुलन पैदा हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों को भी कमिश्नरी सीमा में शामिल किया गया है, जबकि कुछ थानों को ग्रामीण क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया है।

एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली समिति ने पूरे जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की सिफारिश की थी, लेकिन इस पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

वर्तमान में थानों में पुलिस बल की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। एक थाने में जहां औसतन 75 जवानों की आवश्यकता है, वहीं अभी केवल 30 से 35 कर्मी तैनात हैं। अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था से फील्ड में पुलिस बल की कमी और बढ़ सकती है।

सरकार का उद्देश्य कमिश्नरी सिस्टम के माध्यम से कानून व्यवस्था को मजबूत करना और अपराध नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाना है। आने वाले समय में इस व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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