अमेरिका के 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ पर चीन ने जताई कड़ी नाराजगी

चीन ने अमेरिका द्वारा 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि ये टैरिफ 1 नवंबर से लागू होंगे, जिससे चीन और अमेरिका के बीच फिर से व्यापारिक तनाव बढ़ने की संभावना है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इस कदम को दोहरे मानदंड वाला और भेदभावपूर्ण बताया।

चीन ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर निर्यात नियंत्रण का दुरुपयोग कर रहा है और चीन के खिलाफ एकतरफा आर्थिक दबाव बना रहा है। अमेरिकी नियंत्रण सूची में 3,000 से अधिक वस्तुएं शामिल हैं, जबकि चीन की निर्यात नियंत्रण सूची में केवल लगभग 900 वस्तुएं हैं। चीन का कहना है कि इस तरह की एकतरफा नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

वाणिज्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि चीन ने 9 अक्टूबर को रेयर-अर्थ एलिमेंट्स और संबंधित वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण उपाय जारी किए। इसे चीन ने अपनी कानूनी प्रणाली के तहत सामान्य कार्रवाई बताया। चीन का कहना है कि वह हमेशा अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय साझा सुरक्षा की रक्षा करता है और निर्यात नियंत्रण उपायों को विवेकपूर्ण और संतुलित तरीके से लागू करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच यह नया टैरिफ तनाव वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ा सकता है। दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों से निर्यात और आयात पर विभिन्न नीतिगत विवाद चलते रहे हैं। अमेरिकी कदम के बाद चीन ने वाशिंगटन पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया है और इसे दोहरे मानदंड के रूप में देखा।

चीन ने अमेरिका से यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था और वैश्विक औद्योगिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों को सहयोगात्मक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। वहीं व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी महीनों में इस टैरिफ के प्रभाव से वैश्विक बाजार में अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को दोहरे मानदंड वाला और अनुचित बताया है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका लंबे समय से चीन के खिलाफ भेदभावपूर्ण आर्थिक उपाय लागू कर रहा है, जबकि चीन अपनी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी उपाय संतुलित तरीके से करता है। इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका है और वैश्विक बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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