छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत, माता-पिता में गुस्सा और सवाल

छिंदवाड़ा के परासिया कस्बे में जहरीले कफ सिरप कोल्ड्रिफ से 23 बच्चों की मौत ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। प्रभावित परिवारों में दर्द और आक्रोश साफ नजर आ रहा है। माता-पिता लगातार सवाल कर रहे हैं कि डॉ. प्रवीण सोनी ने ऐसी कौन सी दवा दी कि उनके बच्चों की जान नहीं बचाई जा सकी, जबकि अन्य डॉक्टर भी प्रयासरत थे। कई परिवारों ने बच्चों का इलाज कराते समय गहने गिरवी रखे, संपत्ति बेची और कर्ज लिया, लेकिन बच्चों को बचाया नहीं जा सका।
मोर डोंगरी गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है। हर घर में एक जैसी कहानी है—अधूरे सपने, बुझी मुस्कान और माताओं की सूनी आंखें। सीमा पवार का एक वर्ष का बेटा गर्विक भी अब इस दुनिया में नहीं है। सीमा अब भी हर रात बेटे को ढूंढती हैं। गर्विक का जन्मदिन हाल ही में धूमधाम से मनाया गया था, लेकिन अब घर में हंसी की जगह गम और खालीपन छाया हुआ है।
गर्विक के पिता बताते हैं कि 12 सितंबर को बेटे की तबीयत खराब हुई थी। डॉ. प्रवीण सोनी ने उन्हें दवा दी, जिसे पहली खुराक सामने ही दी गई। हालांकि बच्चे को कोई फायदा नहीं हुआ और उल्टी-दस्त शुरू हो गए। दो दिन बाद पेशाब करना भी बंद हो गया। इसके बाद उन्हें चार अन्य डॉक्टरों को दिखाया गया और नागपुर ले जाने की सलाह दी गई। नागपुर में करीब 10 दिन इलाज के बावजूद गर्विक की जान नहीं बच सकी।
पचधार गांव के नीलेश सूर्यवंशी का तीन साल का बेटा मयंक भी इसी कफ सिरप के कारण चल बसा। नीलेश ने बताया कि इलाज के लिए उन्होंने ग्रामीणों और रिश्तेदारों से पैसे उधार लिए, लेकिन कर्ज चुकाने का कोई साधन नहीं है।
चाकाढाना निवासी रसीद बोसम की 14 माह की बेटी संध्या की भी मौत हो गई। रसीद की पत्नी इतरबती ने बताया कि हमने गहने गिरवी रखकर और कर्ज लेकर बच्ची का इलाज कराया। हालांकि सरकार से चार लाख रुपये की सहायता मिली, लेकिन इससे सिर्फ कर्ज उतर सकेगा, बच्चे की जान वापस नहीं आएगी।
इस तरह जहरीले कफ सिरप कांड ने छिंदवाड़ा के बच्चों के परिवारों की जिंदगी को तहस-नहस कर दिया है। माता-पिता अब न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस दर्द से गुजरने को मजबूर न हो।





