छत्तीसगढ़ सेक्स सीडी केस: 2017 से 2026 तक पूरा घटनाक्रम, 23 फरवरी से फिर होगी सुनवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर सेक्स सीडी केस चर्चा के केंद्र में है। इस बहुचर्चित मामले की शुरुआत 27 अक्टूबर 2017 को हुई थी, जब तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कथित सेक्स सीडी सार्वजनिक की थी। सवा आठ साल के लंबे सफर में इस केस ने कई राजनीतिक और कानूनी मोड़ देखे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस और आरोप
27 अक्टूबर 2017 की सुबह भूपेश बघेल ने पत्रकार विनोद वर्मा और कारोबारी कैलाश मुरारका के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को सीडी सौंपी थी। दावा किया गया कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत है। मंत्री मूणत ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सीडी को फर्जी बताया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
पहला केस और ब्लैकमेलिंग का आरोप
भाजपा नेता प्रकाश बजाज की शिकायत पर 26 अक्टूबर 2017 को पंडरी थाने में ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज हुआ। एफआईआर में दावा किया गया कि फोन कर अश्लील वीडियो होने की धमकी देकर पैसे मांगे गए।
फर्जी सीडी और दिल्ली कनेक्शन
जांच में सामने आया कि कथित मॉर्फ सीडी दिल्ली की एक दुकान में तैयार की गई थी। इसी कड़ी में पुलिस और सीबीआई विनोद वर्मा सहित अन्य आरोपियों तक पहुंची।
गिरफ्तारी और सियासी भूचाल
सितंबर 2018 में छत्तीसगढ़ पुलिस ने विनोद वर्मा को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से 500 सीडी और नकद राशि बरामद करने का दावा किया। इस गिरफ्तारी को भूपेश बघेल के राजनीतिक करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। विरोध-प्रदर्शनों के बीच कुछ ही महीनों बाद कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
सीबीआई जांच और कोर्ट की कार्रवाई
सीबीआई ने मामले में जांच करते हुए सीडी को मॉर्फ बताया और केस ट्रांसफर की अर्जी दिल्ली कोर्ट में लगाई। जनवरी 2025 में दिल्ली कोर्ट ने ट्रांसफर से इनकार किया, जिसके बाद रायपुर की विशेष सीबीआई कोर्ट ने 4 मार्च 2025 को भूपेश बघेल को साक्ष्य के अभाव में आरोपों से मुक्त कर दिया।
सेशन कोर्ट से नया मोड़
हालांकि, 24 जनवरी 2026 को रायपुर सेशन कोर्ट ने सीबीआई की रिव्यू पिटीशन स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। अब इस मामले की पहली सुनवाई 23 फरवरी 2026 को होगी। कोर्ट ने भूपेश बघेल को नियमित रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।
हाई कोर्ट जाने की तैयारी
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सेशन कोर्ट के फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए हाई कोर्ट जाने की बात कही है। उनका कहना है कि सच्चाई अदालत में सामने आएगी।
अन्य आरोपियों को राहत नहीं
इस केस में कैलाश मुरारका और विनोद वर्मा को सेशन कोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट के अनुसार उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। केस में कुल आरोपी भूपेश बघेल, कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा, विजय भाटिया और विजय पांड्या हैं। एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा ने पहले ही आत्महत्या कर ली थी।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित सेक्स सीडी केस एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर है और 23 फरवरी की सुनवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।





