छतीसगढ़ हाईकोर्ट:पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी अमान्य: चूड़ी पहनाकर किया विवाह भी कानूनन नहीं माना जाएगा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दूसरी शादी को लेकर एक अहम और साफ फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि पहली पत्नी के जीवित रहते केवल चूड़ी पहनाकर या सिंदूर लगाकर की गई दूसरी शादी हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत मान्य नहीं है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू कानून के अनुसार एक समय में केवल एक ही वैध विवाह हो सकता है। जब तक पहली शादी कानूनी रूप से खत्म नहीं हो जाती, यानी तलाक नहीं हुआ हो या पत्नी का निधन न हुआ हो, तब तक दूसरी शादी को कानून की नजर में शून्य माना जाएगा।
अदालत ने कहा कि केवल चूड़ी पहनाना, सिंदूर लगाना या समाज की सहमति से किसी महिला को पत्नी का दर्जा नहीं दिया जा सकता। विवाह को वैध मानने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम में बताए गए सभी जरूरी नियम और धार्मिक रस्मों का सही तरीके से पालन होना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे पहली पत्नी के अधिकारों का भी हनन होता है। हिंदू कानून में बहुविवाह की अनुमति नहीं है और ऐसा करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी सामाजिक परंपरा या दबाव कानून से ऊपर नहीं हो सकता। यह फैसला उन मामलों के लिए खास माना जा रहा है, जहां समाज या रीति-रिवाजों के नाम पर दूसरी शादी को सही ठहराने की कोशिश की जाती है।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस फैसले से विवाह से जुड़े मामलों में साफ तस्वीर सामने आएगी और महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी। साथ ही यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मजबूत मिसाल बनेगा।





