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कैंसर पीड़ित महिला की ट्रेन में मौत, एंबुलेंस की लापरवाही से शव स्ट्रेचर पर पड़ा रहा एक घंटा

बिलासपुररायपुर से बिलासपुर आकर बुढ़ार जाने के लिए ट्रेन में सफर कर रही एक 62 वर्षीय कैंसर पीड़ित महिला की मौत हो गई। इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन और एंबुलेंस सेवा की लापरवाही उजागर हुई है।

क्या है मामला:

बुढ़ार की रहने वाली रानी बाई अपने पति और परिजनों के साथ रायपुर रेलवे स्टेशन से ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस के जनरल कोच में सवार हुई थीं। महिला की तबियत पहले से खराब थी और सफर के दौरान बिलासपुर स्टेशन पहुँचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। चूंकि वे लोग जनरल डिब्बे में थे, इसलिए टीटीई को सूचना नहीं दे सके।

शव को ले जाने में हुई देरी:

ट्रेन के बिलासपुर पहुँचते ही परिजनों ने कुलियों की मदद से शव को स्ट्रेचर पर रखा और गेट नंबर एक के बाहर ले आए। वहां एक एंबुलेंस खड़ी थी, लेकिन उसका ड्राइवर मौके पर नहीं था। लगभग 15 मिनट बाद जब ड्राइवर पहुंचा, तो उसने शव को ले जाने से मना कर दिया।

दूसरी एंबुलेंस बुलवानी पड़ी:

महिला के परिजनों ने अपने परिचितों की मदद से दूसरी एंबुलेंस का इंतजाम किया। शव को स्ट्रेचर पर रखे हुए एक घंटा बीत गया, तब जाकर एंबुलेंस उपलब्ध हो सकी और परिजन महिला के शव को लेकर रवाना हो पाए।

रेलवे प्रशासन की लापरवाही:

घटना के समय प्लेटफार्म पर मौजूद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और GRP के कर्मचारियों ने भी कोई मदद नहीं की। ट्रेन मैनेजर का कैबिन भी उसी कोच के पास था, लेकिन उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं मिली।

सीएसएम ओझा का कहना है कि उन्हें इस घटना की कोई सूचना नहीं मिली थी, इसलिए वे कुछ नहीं कर सके।

यह पहली बार नहीं है जब बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर ऐसी लापरवाही देखने को मिली है। हाल ही में उत्कल एक्सप्रेस में एक यात्री का पैर ट्रेन के नीचे आ गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसी प्रकार, कुछ दिन पहले एक व्यक्ति ट्रेन के नीचे गिर गया, लेकिन वह सौभाग्य से बच गया।

प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल:

इस घटना ने एक बार फिर रेलवे प्रशासन और यात्री सेवा की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। सवाल उठता है कि हमेशा सतर्कता का दावा करने वाली रेलवे आखिर कब तक ऐसी लापरवाही करती रहेगी?

यह मामला न सिर्फ रेलवे प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और सुविधा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है।

 

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