ब्रिटेन ने भारत को ‘दमनकारी देश’ बताया, जबकि खुद की नीतियों से करोड़ों मौतें कराई थीं

नई दिल्ली:ब्रिटेन की संयुक्त मानवाधिकार समिति द्वारा जारी “इंटरनेशनल रिप्रेशन रिपोर्ट” में भारत को 12 दमनकारी देशों की सूची में शामिल किया गया है। इस सूची में चीन, पाकिस्तान, ईरान, सऊदी अरब, रूस और तुर्किए जैसे देश भी हैं। ब्रिटेन का यह कदम ऐसे समय आया है जब इतिहास में खुद उसकी औपनिवेशिक नीतियों ने करोड़ों लोगों की जान ली थी।

ब्रिटेन ने 16वीं से 20वीं सदी के बीच लगभग 90 देशों पर आक्रमण किया और 56 देशों पर शासन किया। इनमें भारत, केन्या, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल थे। ब्रिटिश साम्राज्य के तहत इन देशों में दमनकारी शासन, युद्ध, नरसंहार और भुखमरी जैसी त्रासदियों ने लाखों-करोड़ों लोगों की जान ली।

भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान, विशेष रूप से 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 की आज़ादी तक, अनुमानित 10 करोड़ भारतीयों की जान ब्रिटिश दमन, युद्धों, अकाल और नीतिगत उपेक्षा के कारण गई। 1943 के बंगाल अकाल में ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की नीतियों के कारण करीब 30 लाख लोग मारे गए थे।

आयरलैंड में 1845-1852 के दौरान पड़े अकाल में 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने खाद्यान्न का निर्यात नहीं रोका। केन्या में 1950 के दशक में माउ माउ विद्रोह के दौरान ब्रिटेन ने हजारों लोगों को बर्बर यातनाएं दीं और गोलियों से भून दिया।

इतिहास गवाह है कि जिन देशों पर ब्रिटेन ने शासन किया, वहां प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया गया, स्थानीय लोगों के अधिकार छीने गए और उन्हें अपने ही देश में गुलाम बना दिया गया। ऐसे में भारत को ‘दमनकारी’ कहने वाला ब्रिटेन खुद के इतिहास पर एक बार नजर डाले तो बेहतर होगा।

ब्रिटेन का यह रुख भारत सहित कई देशों के लिए केवल आलोचना का नहीं, बल्कि दोहरे मानदंडों का परिचायक है।

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