बीजेपी की नई रणनीति: कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी

भारतीय जनता पार्टी ने चार राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति कर संगठनात्मक रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। पार्टी ने पंजाब और त्रिपुरा में ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है, जिनकी राजनीतिक शुरुआत कांग्रेस से हुई थी।
पंजाब में बीजेपी ने केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। ढिल्लों लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और मालवा क्षेत्र में उनका मजबूत प्रभाव माना जाता है। वे 2007 और 2012 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक भी रह चुके हैं। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने साफ संकेत दिया है कि वह पंजाब में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
वहीं त्रिपुरा में अभिषेक देबबर्मा को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उनका शुरुआती राजनीतिक सफर भी कांग्रेस से जुड़ा रहा है। बाद में वे बीजेपी में शामिल हुए और संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
बीजेपी को हमेशा एक कैडर आधारित और अनुशासित पार्टी माना जाता रहा है, जहां बड़े संगठनात्मक पद आमतौर पर पुराने कार्यकर्ताओं और वैचारिक रूप से जुड़े नेताओं को दिए जाते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने खासकर उन राज्यों में रणनीति बदली है, जहां उसे संगठन विस्तार और स्थानीय स्वीकार्यता बढ़ाने की जरूरत महसूस हो रही है।
पंजाब में इससे पहले भी सुनील जाखड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, जो पहले कांग्रेस में थे। इससे साफ है कि बीजेपी अब स्थानीय प्रभाव वाले नेताओं को आगे लाकर राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी पहले भी दूसरे दलों से आए नेताओं को बड़ी जिम्मेदारियां देती रही है। हिमंत बिस्वा सरमा, सम्राट चौधरी, सुभेंदु अधिकारी और माणिक साहा इसके बड़े उदाहरण माने जाते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी अब केवल पारंपरिक कैडर राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि चुनावी जरूरतों, स्थानीय समीकरणों और सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक प्रयोग कर रही है।





