दक्षिण भारत में बीजेपी का मिशन 2026, पीएम मोदी की मंदिर यात्रा से सियासी जमीन मजबूत करने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने की पूरी कोशिश कर रही है। 2026 में होने वाले तमिलनाडु, केरल और पुड्डुचेरी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी अभी से अपनी सियासी रणनीति बनाने में जुट गई है। प्रधानमंत्री मोदी मंदिरों में पूजा-अर्चना कर और विकास की सौगात देकर दक्षिण भारत में पार्टी का जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
तमिलनाडु में रामेश्वरम की यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी 6 अप्रैल को रामनवमी के अवसर पर तमिलनाडु के प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, और धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान रामनाथस्वामी की पूजा करने के साथ-साथ पीएम मोदी नए पंबन ब्रिज का भी उद्घाटन करेंगे।
माना जाता है कि भगवान राम ने लंका विजय के बाद इसी स्थान पर भगवान शिव की पूजा की थी। पीएम मोदी की इस यात्रा को हिंदुत्व की राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे बीजेपी को तमिलनाडु में सियासी बढ़त मिल सकती है। इससे पहले भी लोकसभा चुनाव से पहले मोदी दक्षिण भारत के कई मंदिरों में दर्शन कर चुके हैं।
दक्षिण में बीजेपी की सियासी बिसात
बीजेपी के लिए तमिलनाडु और केरल की राजनीति हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। कर्नाटक में बीजेपी सत्ता में रह चुकी है, लेकिन बाकी दक्षिणी राज्यों में पार्टी अब तक बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई है। यही कारण है कि बीजेपी तमिलनाडु और केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए विशेष रणनीति बना रही है।
तमिलनाडु में बीजेपी, AIADMK के साथ फिर से गठबंधन करने की कोशिश कर रही है, ताकि उसे क्षेत्रीय समर्थन मिल सके। वहीं, केरल में पार्टी ने नया प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर को नियुक्त किया है, जो 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेंगे। बीजेपी केरल में अपनी स्थिति सुधारने और तमिलनाडु में पैर जमाने की पूरी कोशिश कर रही है।
बेंगलुरु में राष्ट्रीय परिषद की बैठक
बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक 18 से 20 अप्रैल के बीच बेंगलुरु में होने जा रही है। इस बैठक में 2026 के विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही, इस दौरान बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर भी मुहर लग सकती है।
इस बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में पार्टी को मजबूत करने की योजना बनाई जाएगी। बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल और केरल की सियासी जमीन अब भी कठिन बनी हुई है, जबकि बिहार में पार्टी जेडीयू के सहयोग से सत्ता का हिस्सा रही है।
संघ भी कर रहा तैयारी
बीजेपी के मिशन साउथ को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी सक्रिय हो गया है। संघ की तीन दिवसीय बैठक बेंगलुरु में हुई, जहां दक्षिण भारत में बीजेपी की स्थिति मजबूत करने पर चर्चा हुई। अब बीजेपी भी अपनी राष्ट्रीय परिषद की बैठक बेंगलुरु में कर रही है, जिससे यह साफ हो जाता है कि पार्टी दक्षिण भारत में अपनी जड़ें जमाने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
2026 के चुनावों की बड़ी तैयारी
2026 में तमिलनाडु, केरल और पुड्डुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा, बिहार में 2025 के आखिर में और पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु व पुड्डुचेरी में 2026 में चुनाव होंगे। बीजेपी की कोशिश है कि वह इन राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करे और जहां वह सत्ता में नहीं है, वहां जीत दर्ज करे।
अभी तक असम को छोड़कर बीजेपी दक्षिण के किसी भी राज्य में अपने दम पर सत्ता में नहीं आ सकी है। हालांकि, संघ और बीजेपी लगातार इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। बेंगलुरु में होने वाली राष्ट्रीय परिषद की बैठक में दक्षिण को फतह करने की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बीजेपी दक्षिण भारत में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पीएम मोदी की मंदिर यात्राओं से लेकर गठबंधन की कवायद और राष्ट्रीय परिषद की बैठक तक, सब कुछ इस मिशन का हिस्सा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की यह रणनीति 2026 के चुनावों में कितनी सफल होती है।





