यूजीसी के नए नियमों पर भाजपा सांसद मनन मिश्रा का विरोध, बताया समाज को बांटने वाला फैसला

यूजीसी के नए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियमों को लेकर भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने खुलकर विरोध जताया है। उन्होंने इन नियमों को हिंदू समाज को जातियों में बांटने वाला निर्णय बताते हुए कहा कि इससे किसी वर्ग को कोई लाभ नहीं होने वाला है।
मनन मिश्रा ने कहा कि यूजीसी अधिकारियों ने यह फैसला बिना सही सोच-विचार के लिया है। उनके अनुसार, यह कदम जाति-पात को बढ़ावा देने वाला है और इससे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो सवर्ण, न ओबीसी और न ही एससी-एसटी वर्ग को इससे कोई फायदा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में सभी छात्रों के लिए समान और सकारात्मक वातावरण होना चाहिए। रैगिंग जैसी बुराइयों को खत्म करना जरूरी है, लेकिन उन्हें जातिगत आधार पर बांटना उचित नहीं है। उनका कहना था कि देशभर में जिस तरह से इन नियमों का विरोध हो रहा है, उससे सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि या तो सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे या फिर यूजीसी को स्वयं इन नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर उचित निर्णय लेगी।
इस मामले में भाजपा युवा विंग के नेता राजू पंडित ने भी नाराजगी जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि ये नियम सुधार की बजाय विभाजन को बढ़ावा दे रहे हैं और छात्रों तथा शिक्षकों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने इसे अपने विरोध का प्रतीक बताया।
वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नियमों की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन नियमों का उद्देश्य समानता को बढ़ावा देना है, न कि किसी प्रकार का टकराव पैदा करना। सरकार इस मुद्दे पर संवाद के लिए तैयार है।





