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संभल हिंसा मामले में बड़ा खुलासा: जफर अली और सांसद बर्क की कॉल डिटेल्स आईं सामने

संभल में बीते साल नवंबर में हुई जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, इस हिंसा की पूरी स्क्रिप्ट पहले से तैयार की गई थी। समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और जामा मस्जिद के सदर जफर अली के बीच कई बार बातचीत हुई थी।

व्हाट्सएप कॉल में दिए गए निर्देश

24 नवंबर की रात जफर अली और सांसद बर्क के बीच कई कॉल्स हुईं। पहली कॉल रात 10:01 बजे जफर ने बर्क को की। फिर रात 12:32 बजे बर्क ने व्हाट्सएप कॉल किया। इस कॉल में उन्होंने कहा, “भीड़ इकट्ठा करिए, कोई सर्वे नहीं होने देना है। मस्जिद हमारी रहेगी।”

हिंसा के बाद भी हुई बातचीत

हिंसा के अगले दिन भी दोनों के बीच बातचीत जारी रही। सांसद बर्क ने जफर को कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताओ कि मौतें पुलिस फायरिंग से हुई हैं। यह सारी बातें कॉल डिटेल्स के जरिए पुलिस के पास हैं और इन्हें केस डायरी में शामिल कर लिया गया है।

जफर ने स्वीकार की बातचीत

पूछताछ में जफर अली ने स्वीकार किया कि हिंसा से पहले, हिंसा के दौरान और बाद में उन्होंने सांसद बर्क से कई बार बात की थी। उन्होंने बताया कि बर्क ने उन्हें भीड़ इकट्ठा करने और सर्वे रोकने के लिए कहा था।

सिर्फ जफर ही नहीं, बल्कि सांसद बर्क की बात भीड़ में मौजूद कई अन्य लोगों से भी हुई थी। पुलिस को मिले कॉल डिटेल्स से यह जानकारी सामने आई है।

जफर अली की गिरफ्तारी और जमानत खारिज

पिछले महीने जफर अली को हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 25 नवंबर को उन्हें हिरासत में लिया गया था, लेकिन 2 घंटे पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। बाद में उन्हें फिर गिरफ्तार किया गया।

संभल की एक अदालत ने जफर अली की जमानत याचिका खारिज कर दी है। एडीजे-2 निर्भय नारायण राय की अदालत ने यह फैसला दिया। इससे पहले केस डायरी न होने के कारण सुनवाई टाल दी गई थी।

संभल हिंसा मामले में कॉल डिटेल्स से साफ हो गया है कि यह घटना अचानक नहीं थी, बल्कि इसकी साजिश पहले से रची गई थी। पुलिस की जांच जारी है और अब यह देखना होगा कि मामले में और कौन-कौन फंसता है।

 

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