दिल्ली ब्लास्ट से पहले आतंकियों में पैसों को लेकर हुआ था झगड़ा, NIA जांच में हुआ बड़ा खुलासा

दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए ब्लास्ट की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के हाथ में है। इस मामले में नया खुलासा हुआ है कि ब्लास्ट से पहले आतंकियों के बीच पैसों को लेकर झगड़ा हुआ था। यह विवाद डॉ. उमर और डॉ. मुज़म्मिल के बीच हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. मुज़म्मिल ने मॉड्यूल के सामने दो शर्तें रखीं: या तो पैसा लौटाओ या फिर सभी सामान वही रखा जाए। मॉड्यूल ने दूसरा विकल्प चुना और सारी सामग्री मुज़म्मिल के पास रखवाई गई, जो बाद में गिरफ्तारी के बाद बरामद हुई।
झगड़े को सुलझाने के लिए उमर ने सिग्नल ऐप पर एक ग्रुप बनाया, जिसमें डॉ. मुज़म्मिल, आदिल, मुफ़्फर और इरफ़ान शामिल थे, लेकिन विवाद नहीं सुलझ पाया। जांच में खुलासा हुआ कि मुज़म्मिल ने साल 2023 में दिल्ली और अन्य शहरों में ब्लास्ट की साजिश रची थी और दो साल से विस्फोटक का इंतजाम किया जा रहा था। अमोनियम नाइट्रेट और यूरिया खरीदने की जिम्मेदारी मुज़म्मिल की थी, जबकि इन्हें विस्फोटक में बदलने की जिम्मेदारी डॉ. उमर मोहम्मद की थी।
ब्लास्ट के लिए सेल्फ फंडिंग की गई। जांच के अनुसार, डॉ. मुज़म्मिल ने तीन लाख रुपये, डॉ. आदिल आठ लाख, डॉ. मुफ़्फर छह लाख, डॉ. उमर दो लाख और डॉ. शहीना पांच लाख रुपये नकद मुहैया कराए। कुल 26 लाख रुपये डॉ. उमर को दिए गए।
अब तक NIA ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें डॉ. मुज़म्मिल शकील गनई (पुलवामा), डॉ. आदिल अहमद राथर (अनंतनाग), डॉ. शहीन सईद (लखनऊ) और मुफ़्ती इरफ़ान अहमद वगाय (शोपियां) शामिल हैं। इसके अलावा आमिर रशीद और जासिर बिलाल वानी उर्फ़ दानिश को भी गिरफ्तार किया गया।
NIA के अधिकारियों ने बताया कि यह जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सौंपी गई है। एजेंसी देशभर की पुलिस के साथ मिलकर आतंकी मॉड्यूल के सभी सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच में यह भी सामने आया कि ब्लास्ट की योजना और धनराशि का विवाद आतंकियों के बीच किसी बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले ही शुरू हो गया था।
इस खुलासे से अब तक की जांच में ब्लास्ट की तैयारी, वित्तीय लेन-देन और मॉड्यूल के अंदर चल रही आपसी लड़ाई की पूरी तस्वीर सामने आई है। NIA इस मामले में और गहन जांच कर रही है ताकि आतंकवाद से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सके।





