दिल्ली दंगे में उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज, शाहरुख पठान को मिली थी राहत

2020 दिल्ली दंगों के आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम को बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। दोनों छात्र पांच साल से जेल में बंद हैं और अपनी लंबी कैद का हवाला देकर रिहाई की मांग कर रहे थे। वहीं, इसी दंगे के दौरान पुलिसकर्मी पर बंदूक तानने वाले आरोपी शाहरुख पठान को इस साल मार्च में पिता की तबीयत खराब होने पर 15 दिन की अंतरिम जमानत मिली थी।

हाई कोर्ट की जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शलिंदर कौर की पीठ ने 133 पन्नों के फैसले में कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और भाषण देने का अधिकार संविधान में संरक्षित है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा या षड्यंत्र की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि असहमति जताना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन यह सब कानून और व्यवस्था के भीतर होना चाहिए।

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यह स्वतःस्फूर्त दंगा नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश थी, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर बदनाम करना था। दिल्ली पुलिस ने भी तर्क दिया कि खालिद और इमाम के भाषणों ने सीएए-एनआरसी, बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और कश्मीर जैसे मुद्दों पर डर और तनाव फैलाया। वहीं, इमाम के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के भाषणों या चैट में कहीं भी हिंसा का आह्वान नहीं था।

फरवरी 2020 में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उमर खालिद और शरजील इमाम पर UAPA समेत IPC की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है। अदालत ने कहा कि केवल लंबी कैद के आधार पर उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।

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