शराब घोटाले में 22 आबकारी अफसरों की जमानत खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- सरेंडर करो

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में फंसे 22 आबकारी अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस अरविंद वर्मा ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इतने बड़े घोटाले में आरोपियों को कोई संरक्षण नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आरोपी पहले निचली अदालत में सरेंडर करें और वहीं से जमानत का आवेदन लगाएं।
दरअसल, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने आबकारी अफसरों पर नकली बारकोड, डमी कंपनियों और ओवर बिलिंग के जरिए अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है। जांच में सामने आया कि अफसरों की मिलीभगत से तीन साल में करीब 60 लाख पेटियां शराब अवैध रूप से बेची गईं, जिससे सिंडिकेट को भारी मुनाफा हुआ। आरोपियों को इस अवैध कारोबार से 88 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मिली थी।
अदालत में अफसरों ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें झूठे केस में फंसाया जा रहा है और वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। कुछ अफसरों ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर राहत मांगी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनके तर्कों को मानने से इनकार कर दिया। इस घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर सहित कई बड़े नाम पहले से ही जेल में हैं।
अब तक इस केस में 70 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। हाईकोर्ट के फैसले से आबकारी अफसरों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की संभावना है। EOW का कहना है कि घोटाले की परतें खोलने के लिए अब तक 200 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं।





