आर्कटिक सर्कल इंडिया फोरम: विदेश मंत्री जयशंकर बोले – भारत को उपदेश नहीं, साझेदारी चाहिए

नई दिल्ली में आयोजित आर्कटिक सर्कल इंडिया फोरम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत की विदेश नीति को लेकर कड़ा और साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत को अब “उपदेशकों” की नहीं, बल्कि “साझेदारों” की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों से किसी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
जयशंकर ने खासतौर पर उन देशों की आलोचना की जो विदेश में कुछ और बोलते हैं और अपने देश में कुछ और करते हैं। उन्होंने कहा, “हम दुनिया की ओर देखते हैं, लेकिन उपदेश सुनने के लिए नहीं। खासतौर पर उन लोगों से नहीं, जो खुद अपने देश में वही चीजें लागू नहीं करते, जिनकी वे दूसरों को सलाह देते हैं।”
यूरोप के दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल
जयशंकर ने यूरोप के कुछ देशों के “दोहरे मापदंड” को लेकर चिंता जताई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब कुछ बदलाव नजर आने लगे हैं। उनका मानना है कि साझेदारी तभी मजबूत होगी जब उसमें संवेदनशीलता, परस्पर हितों की समझ और वैश्विक हालात की जानकारी हो।
भारत की आत्मनिर्भर विदेश नीति का समर्थन
उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत अब वैश्विक मंच पर आत्मनिर्भर और संतुलित विदेश नीति अपना रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत ने जो रुख अपनाया है, उसने दुनिया का ध्यान खींचा है।
पश्चिमी आलोचना पर भी दिया करारा जवाब
जयशंकर ने 2022 में रूसी तेल खरीद को लेकर हुई आलोचना का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने तब भी अपने हितों को प्राथमिकता दी थी और आगे भी यही करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान का हवाला देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री ने कहा था कि वही करो जिससे भारत को लाभ हो। हमने वही किया है।”
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत दुनिया के साथ संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है और बिना किसी दबाव के अपने फैसले खुद ले रहा है।





