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वायुसेना दिवस: 2047 तक कितनी शक्तिशाली हो सकती है भारतीय वायुसेना?

नई दिल्ली:भारत आज अपनी वायुसेना का 93वां स्थापना दिवस मना रहा है। 8 अक्टूबर 1932 को स्थापित हुई भारतीय वायुसेना ने बीते दशकों में कई उपलब्धियां हासिल की हैं और आने वाले वर्षों में इसकी शक्ति और भी बढ़ने की उम्मीद है।

ऑपरेशन सिंदूर बना मिसाल

हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि भारतीय वायुसेना अब पहले से कहीं अधिक आधुनिक, सटीक और ताकतवर हो चुकी है। इस अभियान में वायुसेना ने थलसेना, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम के साथ मिलकर आतंकियों के ठिकानों पर सफलतापूर्वक हवाई हमले किए। इसे युद्ध के नए स्वरूप की शुरुआत माना जा रहा है, जहां बंदूकों से ज्यादा तकनीक और डेटा की भूमिका होगी।

ड्रोन और AI बढ़ाएंगे ताकत

वायुसेना अब मानव रहित विमानों (ड्रोन), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बेहतर कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क पर तेजी से काम कर रही है। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए थिएटर कमांड की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। ड्रोन न सिर्फ युद्ध में बल्कि निगरानी और राहत कार्यों में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

स्वदेशी लड़ाकू विमान

‘मेक इन इंडिया’ के तहत कई स्वदेशी विमान परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें तेजस Mk-1A, AMCA (अग्रिम मल्टी-रोल लड़ाकू विमान) और भारत का पहला स्टेल्थ फाइटर जेट शामिल है। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने पर भारत खुद के अत्याधुनिक फाइटर जेट्स बनाने वाले देशों में शामिल हो जाएगा।

2047 तक 60 स्क्वाड्रन का लक्ष्य

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास करीब 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि न्यूनतम ऑपरेशन क्षमता के लिए 42 स्क्वाड्रन जरूरी माने जाते हैं। लक्ष्य है कि 2047 तक यह संख्या बढ़ाकर 60 स्क्वाड्रन की जाए, यानी करीब 1100 से 1200 लड़ाकू विमान।

बेड़े का आधुनिकीकरण

फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास लगभग 550 से 600 लड़ाकू विमान हैं। पुराने विमानों जैसे MiG-21, MiG-23 और MiG-27 को रिटायर कर उनकी जगह आधुनिक विमान जैसे Su-30MKI, MiG-29, Mirage 2000, Jaguar, Rafale और Tejas Mk-1 शामिल किए जा रहे हैं।

एयर डिफेंस सिस्टम ‘आकाशतीर’

भारत का स्वदेशी एयर डिफेंस नेटवर्क ‘आकाशतीर’ अब सक्रिय हो चुका है। इस प्रणाली ने हालिया अभियानों में दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर अपनी ताकत साबित की। इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है।

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