AI से 10 साल में 30 लाख नौकरियां खत्म होने का खतरा, हाई-स्किल सेक्टर में बढ़ेगी मांग

नई रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दस सालों में करीब 30 लाख लो-स्किल नौकरियां AI और ऑटोमेशन के कारण समाप्त हो सकती हैं। नेशनल फाउंडेशन फॉर एजुकेशनल रिसर्च (NFER) की स्टडी में बताया गया है कि मशीनें ट्रेड, मशीन ऑपरेशंस और एडमिनिस्ट्रेटिव कामों को तेजी से रिप्लेस कर रही हैं। वहीं, इसी अवधि में 23 लाख नई नौकरियां बन सकती हैं, लेकिन वे ज्यादातर हाई-स्किल सेक्टर में होंगी। इसका मतलब है कि कम कौशल वाले लोगों के लिए रोजगार संकट और रिस्किलिंग की चुनौती बढ़ जाएगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एडमिन असिस्टेंट, मशीन ऑपरेटर, वेयरहाउस स्टाफ, कैशियर और ट्रेड वर्क जैसे प्लंबिंग, रूफिंग, इलेक्ट्रिकल कामों पर सबसे बड़ा खतरा है। ये काम रिपीटेटिव और प्रीडिक्टेबल होने के कारण AI और रोबोटिक सिस्टम आसानी से कर सकते हैं।

हाई-स्किल सेक्टर जैसे इंजीनियरिंग, साइंस और एजुकेशन में नौकरियों की मांग बढ़ेगी, लेकिन काम करने का तरीका बदल जाएगा। AI रिसर्च, डॉक्यूमेंट ड्राफ्टिंग और डेटा एनालिसिस जैसे कार्य संभाल लेगा, जिससे जूनियर लेवल की नौकरियों की जरूरत कम हो सकती है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि लो-स्किल वर्कर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती रिस्किलिंग होगी। नई नौकरियों में ज्यादातर प्रोफेशनल और एसोसिएट प्रोफेशनल रोल होंगे, जिन तक लो-स्किल वर्कर्स आसानी से नहीं पहुंच पाएंगे।

बड़ी कंपनियां पहले ही AI की वजह से कटौती शुरू कर चुकी हैं। Clifford Chance ने लंदन में अपनी बिजनेस सर्विसेज टीम से 10% स्टाफ हटाया, PwC ने 2021-2026 में 1 लाख भर्तियों की योजना वापस ली, Apple और Google ने भी कुछ कर्मचारियों की संख्या कम की। हालांकि NFER के अनुसार सभी छंटनियों का मुख्य कारण AI नहीं, बल्कि आर्थिक अनिश्चितता भी हो सकती है।

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