खामेनेई के निधन के बाद ईरान में नए सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू, जानें कैसे होता है चुनाव

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की पुष्टि के बाद देश और दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अब ईरान का अगला सर्वोच्च नेता कौन होगा और उसका चयन कैसे किया जाएगा। ईरान का राजनीतिक ढांचा अन्य देशों से अलग है, जहां सर्वोच्च नेता के पास सबसे अधिक संवैधानिक, धार्मिक और सैन्य अधिकार होते हैं।

ईरान के संविधान के मुताबिक, सर्वोच्च नेता के निधन या पद खाली होने की स्थिति में 88 वरिष्ठ धर्मगुरुओं की एक विशेषज्ञ सभा नए नेता का चुनाव करती है। इन धर्मगुरुओं को ईरान की जनता हर आठ वर्ष में मतदान के जरिए चुनती है। यही सभा योग्य उम्मीदवारों में से नए सर्वोच्च नेता का चयन करती है।

विशेषज्ञ सभा उम्मीदवार के धार्मिक ज्ञान, इस्लामी कानून (शरिया) की समझ, राजनीतिक दृष्टि, नेतृत्व क्षमता और देश की परिस्थितियों से निपटने की योग्यता का आकलन करती है। चयन प्रक्रिया गोपनीय बैठकों के जरिए पूरी की जाती है और आमतौर पर सहमति या बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाता है।

ईरान में सर्वोच्च नेता का पद बेहद शक्तिशाली माना जाता है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अब तक केवल दो व्यक्ति इस पद पर रहे हैं—पहले अयातोल्लाह रुहोल्ला खुमैनी और उनके बाद अयातुल्ला अली खामेनेई। सर्वोच्च नेता देश की सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख होते हैं और रक्षा नीति पर अंतिम निर्णय लेते हैं।

इसके अलावा सर्वोच्च नेता न्यायपालिका प्रमुख की नियुक्ति, गार्जियन काउंसिल के आधे सदस्यों के चयन, सरकारी मीडिया प्रमुखों की नियुक्ति और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रपति को पद से हटाने की शक्ति भी उनके पास होती है।

खामेनेई के निधन के बाद अब ईरान में राजनीतिक हलकों में संभावित उत्तराधिकारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला निर्णय न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति बल्कि पूरे मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

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