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A Unique Scam: बिलासपुर में जमीन घोटाले का अनोखा खेल, 1928 का भू-स्वामी 2023 में बना 46 साल का जवान…

सिरगिट्टी में मुर्दा हुआ 'जिंदा', फर्जीवाड़े से 95 साल पुराने रिकॉर्ड को बदलकर करोड़ों की जमीन पार

बिलासपुर में जमीन घोटाले का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, (A Unique Scam)जो सरकारी सिस्टम की सुरक्षा और राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। यहाँ भू-माफियाओं ने शातिर तरीके से 1928 में दर्ज एक मृत व्यक्ति को 2023 में कागजों में न सिर्फ जिंदा कर दिया, बल्कि उसे 46 साल का युवक बताकर जमीन का नामांतरण भी अपने पक्ष में करा लिया। “मुर्दे” को कागजों में जिंदा कर करोड़ों की जमीन हड़पने का यह खेल अब प्रशासन की रडार पर है

फर्जीवाड़े से 95 साल पुराने रिकॉर्ड को बदलकर करोड़ों की जमीन पार (A Unique Scam)

पूरा मामला सिरगिट्टी इलाके का है, जहां 1928 के राजस्व रिकॉर्ड में कौशल प्रसाद ब्राह्मण के नाम पर बेशकीमती जमीन दर्ज थी। लंबे समय तक नामांतरण न होने का फायदा उठाते हुए जालसाजों ने एक सुनियोजित साजिश रची। अचानक 2023 में कौशल प्रसाद सूर्यवंशी नाम का एक व्यक्ति खड़ा किया गया, जिसे रिकॉर्ड के अनुसार 46 साल का बताकर फौती नामांतरण करा दिया गया। आरोप है कि 95 साल पुराने रिकॉर्ड को नया चेहरा देकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और फिर रमेश पांडे को पावर ऑफ अटॉर्नी देकर जमीन बिसाऊ श्रीवास और कुंती श्रीवास को बेच दी गई। इस पूरी प्रक्रिया में कागजों का ऐसा मायाजाल बुना गया कि जमीन हाथों-हाथ ट्रांसफर कर दी गई…..

इस बड़े खुलासे के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है और मामले की जांच तेज कर दी गई है। एसडीएम बिलासपुर मनीष साहू का कहना है कि पूर्व में भी ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई हुई है और इस ताज़ा घोटाले की जांच पूरी होते ही दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, यह मामला सिस्टम की एक बड़ी खामी को उजागर करता है कि कैसे सरकारी रिकॉर्ड में सेंध लगाकर पहचान बदली जा रही है। सवाल यह है कि क्या यह सब बिना किसी विभागीय मिलीभगत के संभव है? बिलासपुर का यह घोटाला सिर्फ एक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है जो चुपचाप जमीनों की बंदरबांट कर रहा है….

​अब बिलासपुर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस जालसाजी की जड़ों तक पहुँचना है, क्योंकि यह मामला साबित करता है कि सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा में सेंध लगाना भू-माफियाओं के लिए बेहद आसान हो चुका है। कागजों में मृत व्यक्ति को पुनर्जीवित कर जमीन बेचने का यह दुस्साहस बिना किसी उच्च स्तरीय मिलीभगत के संभव नहीं लगता। फिलहाल, पीड़ित पक्ष की शिकायत और राजस्व विभाग की सक्रियता के बाद जाँच का दायरा बढ़ाया गया है, जिससे आने वाले दिनों में कई सफेदपोश चेहरों से नकाब उतरने की उम्मीद है। देखना होगा कि प्रशासन दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजकर इस बेची गई जमीन पर क्या सख्त रुख अपनाता है….

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